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अंग्रेजों ने खडे पहाड़ बना डाला था रेलवे ट्रैक, लोगों ने नाम दिया खूनी घाटी

डीगढ़। ब्रितानियों ने भारत के आजाद होने से पहले कुछ चीजें ऐसी भी तैयार करके दी जिनकी विश्व भर में अपनी ही पहचान है। पंजाब सरकार का हिमाचल प्रदेश में एक पावर प्रोजेक्ट है जो पंजाब को बिजली मुहैया करवाता है। इस प्रोजेक्ट को तैयार करने के लिए अंग्रेजों ने खड़ी पहाड़ी पर रेलवे ट्रैक तैयार करवा दिया था। पढ़ें पूरी खबर…
-यह रेलवे ट्रैक 75 डिग्री खड़ी पहाड़ी से जब गुजरता है तो इस पर चलने वाली ट्राली में बैठे लोगों की सांसें थमने लग जाती हैं।
-इस पावर प्रोजेक्ट पर पिछले कई वर्षों से पंजाब व हिमाचल सरकार में खींचतान चली हुई है।
कहां है यह खूबसूरत स्थल…
-हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में जोगिंद्रनगर और बरोट बेहद खूबसूरत पर्यटन स्थल हैं।
-मंडी जिला मुख्यालय से इस स्थल की दूरी 65 किमी है।
-बरोट में बांध बनाने के लिए 1926 में अंग्रेज इंजीनियर कर्नल बैटी ने एक रोप-वे ट्रॉली (हॉलेज ट्रॉली) का निर्माण किया।
-इस ट्रॉली के जरिए बांध का सारा सामान जोगिन्द्र नगर से बरोट पहुंचाया गया था।
-यह ट्रॉली आज भी कार्य करती है। इस ट्रॉली की खासियत यह है कि यह बिना किसी इंजन के सहारे काम करती है।

खूनी घाटी के नाम से भी जाना जाता है, ट्राली रेलवे ट्रैक…
-वर्तमान में यह ट्रॉली जोगिंद्रनगर के शानन पावर हाउस से बैंच कैंप, हैडगियर, कथयाडू (यह ट्रॉली का कंट्रोल प्वाइंट है) व जीरो प्वाइंट तक चलती है।
-पहले यह ट्रॉली बांध तक थी। कथयाडू से लेकर जीरो प्वाइंट के रास्ते को खूनी घाटी के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि यहां ट्रॉली लगभग 75 अंश के कोण पर चलती है और कई लोगों की जान भी ले चुकी है।
-बरोट मंडी जिले का आखिरी गांव है। इस स्थल तक पहुंचने के लिए मंडी-पठानकोट राष्ट्रीय उच्च मार्ग से होकर जाना पड़ता है।

परियोजना पर है विवाद…

-हिमाचल सरकार शानन प्रोजेक्ट पर हक के लिए केंद्र सरकार से कई बार मांग कर चुकी है।
-हिमाचल के पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल का कहना है कि जोगिंद्रनगर में स्थापित शानन पावर हाउस को हिमाचल प्रदेश को स्थानांतरित किया जाना चाहिए।
-उन्होंने कहा कि पंजाब के साथ हिमाचल की लंबे समय से चली आ रही इस मांग का जनहित में निपटारा किया जाना जरूरी है।
-धूमल का कहना है कि शानन परियोजना को स्थापित करने के लिए 3 मार्च, 1925 को तत्कालीन पंजाब सरकार तथा मंडी के राजा के बीच समझौता हुआ था।
-केंद्र सरकार ने पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 के प्रावधानों के अंतर्गत परिसंपत्ति, अधिकारों एवं देनदारियों की नियुक्ति के संबंध में अधिसूचनाएं जारी करते हुए 1 मई, 1967 को शानन पावर हाउस को त्रुटिपूर्ण तरीके से पंजाब को दे दिया था।
-उन्होंने कहा कि इस पावर प्रोजेक्ट को हिमाचल प्रदेश राज्य को स्थानांतरित करने के मामले पर फिर सोचा जाना चाहिए।

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