कैंसर से जंग जीतने वाले योगी के मुरीद से मिलिए

Samagya Reporter: 15 महीने पहले यूपी के हाथरस जिले के आशीष द्विवेदी को जब यह पता चला कि उन्हें कैंसर है, तो उनकी जिंदगी मानो थम सी गई। इलाज का खर्च तिल-तिल कर उन्हें तोड़ रहा था। लाखों रुपये के ट्रीटमेंट के बावजूद दुनिया में अंधकार नजर आ रहा था। जानलेवा बीमारी का दर्द और आर्थिक संकट के आगे उनकी तमाम उम्मीदें दम तोड़ती नजर आ रही थीं। लेकिन रविवार को उनके एक ट्वीट के बाद लगा कि दुश्वारियों का दौर खत्म हो चुका है।

हाथरस जिले के आशीष द्विवेदी को जून 2016 में पता चला कि उन्हें ब्लड कैंसर है। बागला इंटर कॉलेज में मैथ्स के टीचर आशीष इलाज के लिए मुंबई के टाटा कैंसर रिसर्च इंस्टिट्यूट पहुंचे। लेकिन घर की दूरी की वजह से उन्होंने दिल्ली के रोहिणी स्थित राजीव गांधी कैंसर रिसर्च इंस्टिट्यूट में अपना केस रिफर कराया।

एनबीटी से फोन पर खास बातचीत में आशीष ने बताया, ‘एक महीने का दवा का खर्च पौने 2 से 2 लाख रुपये है। मेरी आर्थिक स्थिति खराब होती जा रही थी। दोस्तों की मदद से किसी तरह इलाज करा रहा था। नवंबर 2015 में मां के पैर में फ्रैक्चर हो गया था। उनके इलाज में जो भी जमापूंजी थी, वह भी खर्च हो गई। सर्जरी के लिए जीपीएफ फंड से 3 लाख 60 हजार रुपये निकाले। मुझे पता नहीं था कि एक-डेढ़ महीने के बाद वह पैसे मेरे काम आने वाले थे।’

राजीव गांधी कैंसर अस्पताल में सफल इलाज कराने के बाद आशीष ने यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ का आभार जताते हुए रविवार को ट्वीट किया, ‘मेरे प्राणों की रक्षा हेतु आपके द्वारा किए गए आर्थिक सहयोग के लिये जीवन पर्यंत सपरिवार आपका आभारी रहूंगा।’

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