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हर मिनट 2787 रिटर्न, अंतिम तारीख पर फाइल हुए इतने लाख ITR

हर मिनट 2787 रिटर्न, अंतिम तारीख पर फाइल हुए इतने लाख ITR
Publish Date:Tue, 05 Sep 2017 10:11 AM (IST) | Updated Date:Tue, 05 Sep 2017 10:11 AM (IST)
हर मिनट 2787 रिटर्न, अंतिम तारीख पर फाइल हुए इतने लाख ITRहर मिनट 2787 रिटर्न, अंतिम तारीख पर फाइल हुए इतने लाख ITRदुनिया के बाकी देशों की तुलना मे भारत में आखिरी तारीख पर रिटर्न भरने वालों की संख्या कहीं ज्यादा होती है
नई दिल्ली (हरिकिशन शर्मा)। भारत में लोग न सिर्फ टैक्स देने से कतराते हैं बल्कि रिटर्न फाइल करने में भी टालमटोल करते हैं। हाल यह है कि लाखों लोग टैक्स रिटर्न दाखिल करने के लिए अंतिम तिथि का इंतजार करते हैं। लोगों की यह आदत साल दर साल और बढ़ रही है। इस साल ही अंतिम तिथि पर हर मिनट औसतन 2,787 आयकर रिटर्न दाखिल हुए।

आयकर विभाग के अनुसार ई-फाइलिंग वेबसाइट के जरिये इस साल एक अप्रैल से पांच अगस्त के दौरान कुल 2.82 करोड़ आयकर रिटर्न दाखिल हुए जिसमें से 17.66 लाख रिटर्न अंतिम तिथि पांच अगस्त को दाखिल हुए। सरकार ने वित्त वर्ष 2016-17 के लिए रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई से बढ़ाकर पांच अगस्त की थी। चौंकाने वाला तथ्य यह है कि आखिरी दिन हर घंटे औसतन 1.46 लाख रिटर्न दाखिल हुए। इसमें भी आधे से ज्यादा रिटर्न ऐसे थे जो कार्यालय खुलने के समय फाइल नहीं किए गए।

यह स्थिति सिर्फ आयकर के संबंध में नहीं है। अप्रत्यक्ष करों के मामले में भी यही हाल है। राजस्व विभाग के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के बाद सरकार ने पहला रिटर्न जीएसटीआर3बी फाइल करने को व्यापारियों और कारोबारियों को 20 अगस्त तक समय दिया था लेकिन बहुत से लोग अंतिम तिथि के इंतजार में अपना रिटर्न दाखिल नहीं कर पाए। यही वजह है कि सरकार को जीएसटीआर3बी दाखिल करने की सीमा 20 अगस्त से बढ़ाकर 25 अगस्त करनी पड़ी। उन्होंने कहा कि प्रत्यक्ष कर हो या परोक्ष कर, करदाताओं की रिटर्न फाइल करने की प्रवृत्ति एक तरह की ही है। वे इसके लिए अंतिम तिथि का ही इंतजार करते हैं।

आयकर विभाग के अनुसार वित्त वर्ष 2016-17 में भी 21.79 लाख करदाताओं ने अंतिम तिथि को आयकर रिटर्न दाखिल किया था। अधिकारी ने कहा कि सरकार के बार-बार आग्रह के बावजूद करदाता अंतिम तिथि के लिए इंतजार करते हैं। उल्लेखनीय है कि बमुश्किल एक प्रतिशत भारतीय ही आयकर देते हैं। भारत में कर और जीडीपी अनुपात भी काफी कम है। विकसित देशों में टैक्स-जीडीपी अनुपात 30 प्रतिशत के आसपास है जबकि भारत में यह आंकड़ा काफी नीचे है।

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