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तेरापंथ धर्मसंघ के कीर्तिधर आचार्य श्री महाश्रमण जी का साउथ हावड़ा में भव्य मंगल प्रवेश

कोलकाता : तेरापंथ धर्मसंघ के एकादाम अधिशस्ता राष्ट्र संत महातपस्वी आचार्य श्री महाश्रमणजी का अपनी धवल सेना के साथ साउथ हावड़ा की पावन धरा पर भव्य मंगल प्रवेा हुआ। अहिंसा यात्रा श्रीराम वाटिका उत्तर हावड़ा से प्रारंभ होकर आचार्य महाप्रज्ञ स्तंभ विवेक वहार स्थित क्लब हाउस पहुंची। हजारों की संख्या में श्रावक-श्रावकाओं ने रैली में भाग लया। श्री जैन श्‍वेताम्बर तेरापंथी सभा साउथ हावड़ा के अध्यक्ष शिखरचंद लूणावत ने आचार्यश्री का स्वागत व अभिवंदना की।

तृणमूल कांग्रेस हावड़ा के उपाध्यक्ष महेंद्र अग्रवाल, चेयरमैन, हावड़ा के मेयर रथीन चक्रवर्ती आदि गण्यमान्य राजनीतिक हस्तियों गण्यमान्य राजनीतक हस्तियों ने पूज्यप्रवर के दर्शन कये एवं आशीर्वाद प्राप्त कया। तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रकाश मालू एवं युवक परिषद् के अध्यक्ष राजेश दुगड़ ने पूज्यप्रवर के स्वागत में अपने विचार रखे।

हावड़ा तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम द्वारा मंगल संगान हुआ। महिला मंडल की बहनों ने गीतका संगान कया। साउथ हावड़ा सभा के मंत्री बसंत पटावरी ने विचार व्यक्त कए। साउथ हावड़ा महिला मंडल की अध्यक्षा लीला चोऱडिया ने भावभरा अभिनंदन कया। संघ महानिदेशक साध्वी प्रमुखा कनक प्रभाजी की प्रेरणादायी उद्बोधन तथा मुख्य नियोजिका साध्वी विश्रुतविभाजी, मुनिश्री आलोक कुमारजी, साध्वी श्री मालिकयाशा जी एवं मुमुक्षु वंदना ने अपनी भावनायें रखीं। साउथ हावड़ा के श्रावक-श्रावका समाज द्वारा स्वागत गीत प्रस्तुत कया गया। ज्ञानाशाला के बच्चों व कन्या मंडल की कन्याओं ने उत्साह से भाग लया। गुरु जीवन के सर्वोच्च कलाकार, सृजनहार एवं पथ प्रदर्शक होते हैं। उनका उपदेश भौतिक उपलब्धियोें की प्राप्ति के लिए न होकर जीवन के अंतिम लक्ष्य मोक्ष-प्राप्ति हेतु होता है। सत्य को समझने के लए हमें अपने सभी पूर्वाग्रहों को छोड़ना होगा। आध्यात्मिक साधना के लिए आंत्मानुशासन आवश्यक है।

युद्ध में हजारों योद्धाओं को जीतने की अपेक्षा अपने आपको जीतना, अनुशासि, संयमित रखना कठिन है। आत्मा पर लगे कर्मों का आवरण हटते ही व्यक्ति सर्वज्ञ सर्वदर्शी बन जाता है। महावीर वाणी का यही सार है, उन्होंने मानव को उसके परम लक्ष्य एवं कर्तव्यों का बोध कराया।

नर से नारायण, आत्मा से परमात्मा बनने की कला सखाई। महावीर की परम्परा के श्रमण और श्रमणीवर्ग जिस सूक्ष्म अहिंसा का पालनकर अपनी जीवनचर्या चलाते हैं कठोर साधना करते हैं वैसी आचार संहिता अन्य मिलना कठिन है। आचार्य प्रवर की अमृतवाणी से हजारों लोग लाभान्वित हुए। उपरोक्त जानकारी प्रवास व्यवस्था समिति की महामंत्री सूरज बरड़िया ने दी। इस मौके पर महेंद्र अग्रवाल, धर्मचंद चोरड़िया, बसंत पटावरी, लक्ष्मीपत बासना, सुशील गीरिया, मनोज कोठारी, मनोज सिंघी, मंगीलाल सेठिया, सुशील सुराना, राजेंद्र सुराना व अन्य उपस्थित थे।

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