रावण से भी शक्तिशाली थे यह तीन योद्धा

यदि रामायण के खलनायक की बात की जाए तो सभी का जवाब रावण ही होगा लेकिन क्या आप जानते है कि रावण अपनी शक्ति के कारण अभिमानी नहीं था बल्कि उसकी सेना के कारण उसे स्वयं पर अहंकार था।प्राचीन काव्य अनुसार रावण के पास इतनी शक्तिशाली सेना थी कि वह कुछ क्षण में पृथ्वी को मिटा सकती थी। ये तीन योद्धा रावण से भी शक्तिशाली थे- मेघनाद- रावण ने स्वयं को अमर बनाने के लिए हर मुमकिन प्रयास किए, लेकिन बह्रमा जी ने उसे वरदान नहीं दिया। जब रावण खुद अमर नहीं हो सका तो उसने अपने पुत्र को अमर बनाने के लिए भी ग्रहों की दशा को बदल डाला था परन्तु शनि ने अपनी दशा को बदल दिया जिसकी वजह से उसका पुत्र मेघनाद बलशाली होने के बावजूद क्षीण आयु का हुआ। कुम्भकरण- यह रावण का सबसे बलशाली भाई हुआ क्योंकि बह्रमा से वरदान मिलने से वह 6 माह तक सोता था और 6 माह जागृत रहता था। जब कुम्भकरण जागता तो वह भोजन के रूप में मनुष्य और प्राणियों को खा जाता था। वह इतना बलवान था कि एक समय में समस्त सेना का भोजन कर लेता था। अहिकत्या- यह रावण का श्रेस्ठ बलवान पुत्र था जो पूरी तरह से मायावी था उसको मार पानाकिसी के लिए संभव नहीं था क्योंकि वह अपनी माया ऐसे जाल जिसमे दुश्मन फँस कर अपने
प्राण त्याग देता था सबसे विचित्र बात यह है कि उसकी मृत्यु का रहस्य मात्र नारद मुनि और इंद्र देव ही जानते थे। प्राचीन रामायण अनुसार रावण के पास वह सभी अस्त्र थे जिसको आज परमाणु बम का नाम
दिया जाता है उसकी लंका में कोई व्यक्ति प्रवेश नहीं कर सकता था मात्र हनुमान जी ही ऐसे थेजो उड़ कर लंका में प्रवेश कर गए थे।

विनय मिश्रा

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