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क्रेडिट कार्ड से जुड़ी ये बातें जाननी आपके लिए है बेहद जरूरी

ऑनलाइन शॉपिंग हो या फिर रिटेल स्‍टोर से कोई सामान खरीदना हो. आजकल क्रेडिट कार्ड (Credit Card) ने हमारे लिए किसी भी जगह पेमेंट करना काफी आसान बना दिया है. लेकिन क्रेडिट कार्ड का इस्‍तेमाल जितना सुविधाजनक है, इसके प्रयोग में उससे भी ज्‍यादा जिम्‍मेदारी बरतने की जरूरत होती है. क्रेडिट कार्ड एक तरह का पर्सनल लोन है, जिसका सीधा असर अपाके क्रेडिट स्‍कोर पर पड़ता है. क्रेडिट स्‍कोर के निगेटिव प्‍वाइंट आपको होमलोन, कार लोन या किसी अन्‍य पर्सनल लोन लेने में मुश्किल खड़ी कर सकते हैं. वहीं, क्रेडिट कार्ड से लिया गया यह लोन सबसे महंगा लोन है, ऐसे में एक बार पेमेंट डिफॉल्‍ट करने से आपको ब्‍याज की भारी चपत लगती है. इसीलिए आज हम आपको क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल का सही तरीका बता रहे हैं.

(1) कितने तरह के होते हैं क्रेडिट कार्ड- क्रेडिट सुधार के को-फाउंडर गौरव वाधवानी का कहना है कि क्रेडिट कार्ड कई प्रकार के होते हैं जैसे ऑटो/फ्यूल क्रेडिट कार्ड, बिजनेस क्रेडिट कार्ड, को-ब्रांडेड क्रेडिट कार्ड, महिला क्रेडिट कार्ड, एंटरटेनमेंट कार्ड, प्रीमियम/ सिग्नेचर कार्ड और ट्रैवल क्रेडिट कार्ड

(2) भूलकर भी न करें काम- गौरव वाधवानी का कहना है कि क्रेडिट कार्ड को संभालकर रखें उसका पिन/पासवर्ड किसी को ना बताएं. एसएमएस अपडेट एक्टिवेट कराएं. गैजेट्स को एंटी वायरस से सुरक्षित रखें. पब्लिक Wi-Fi में कार्ड का इस्तेमाल ना करें. अकाउंट बैलेंस जरूर चेक करें. धोखाधड़ी की शिकायत तुरंत कराएं. क्रेडिट कार्ड के बकाया पर ईएमआई के ऑफर को समझें और चार्ज पर ध्यान दें. ईएमआई के लिए ब्याज पर जरूर ध्यान दें.

(3) महंगे इंटरेस्ट चार्ज से बचने के लिए समय पर करें पेमेंट- किसी भी अन्य लोन की तुलना में क्रेडिट कार्ड पर लगने वाला ब्याज काफी ज्यादा होता है. यह करीब 30 फीसदी से 35 फीसदी प्रति वर्ष होता है. अगर बैंक आपसे 2 फीसदी से 3 फीसदी का ब्याज कह रहा है, तो वह आपको भ्रमित कर रहा है. ऐसा इसलिए, क्योंकि अन्य तरह के ब्याज हमेशा सालाना तौर पर बताए जाते हैं, लेकिन क्रेडिट कार्ड का ब्याज मासिक आधार पर बताया जाता है. इसका आकलन अगर आप एक साल के हिसाब से करेंगे तो ब्याज काफी ज्यादा का बनता है.

(4) ग्रेस पिरियड के पूरा होने पर ही ब्याज कैल्कुलेट होता है. सामान्य तौर पर क्रेडिट कार्ड की पेमेंट में 20 से 25 दिनों का ग्रेस पिरियड होता है.

(5) अपनी पुरानी पेमेंट साइकल के सभी देय राशि के भुगतान के बाद ही आप ग्रेस पिरियड के योग्य होते हैं. इंटरेस्ट रेट 30 फीसदी से 45 फीसदी तक के बीच रहता है.

(6) जिन क्रेडिट कार्ड में इंटरेस्ट फ्री ईएमआई का विकल्प होता है, उनमें प्रोसेसिंग फीस जुड़ी होती है. इसलिए इंटरेस्ट फ्री ईएमआई का चयन करने से पहले प्रोसेसिंग फीस के बारे में पता कर लें.

(7) अगर क्रेडिट कार्ड की देय राशि का भुगतान नहीं करते हैं तो अकाउंट बंद करने की तारीख तक बकाया जमा होता रहता है. इसलिए क्रेडिट कार्ड के बकाया राशि का भुगतान नियमित रूप से करें.

(8) क्रेडिट स्कोर खराब होने के कुछ कारण है जैसे कि वक्त पर क्रेडिट कार्ड की पेमेंट नहीं कर रहे. क्रेडिट कार्ड पर बकाया रखते हैं. क्रेडिट हिस्ट्री और  तरह-तरह के लोन लेने के कारण क्रेडिट स्कोर पर असर पड़ता है. कर्ज के लिए बार-बार पूछताछ करने पर भी आपके क्रेडिट स्कोर पर असर पड़ता है. आपको बता दें कि भारत में ट्रांस यूनियन सिबिल, इक्विफैक्स, एक्सपीरियन और हाइमार्क क्रेडिट ब्यूरो है.

(9) क्रेडिट स्कोर सुधारने के लिए समय पर क्रेडिट कार्ड का बिल भरें. लोन ईएमआई को वक्त पर चुकाएं. 6 महीने तक वक्त पर कर्ज चुकाने से सुधार होगा. पूरी लिमिट का इस्तेमाल न करें. क्रेडिट कार्ड से ज्यादा लोन ना लें. बहुत सारे लोन के लिए आवेदन ना करें. होम, ऑटो जैसे सिक्योर्ड लोन को अहमियत दें. पर्सनल लोन लेने से बचें और क्रेडिट कार्ड अकाउंट बंद करने से बचें. ज्वाइंट अकाउंट खातों की समीक्षा करते रहें. अपने सिबिल स्कोर की समीक्षा करते रहें.