साइबर हमले का PAK और चीन को मुंहतोड़ जवाब देगा भारत

चीन और पाकिस्तान के हैकरों द्वारा किए जाने वाले साइबर हमले से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने उच्चस्तरीय बैठक बुलाई गई. इस दौरान साइबर हमले पर जवाबी कार्रवाई करने की सभी रणनीति पर चर्चा की गई है. इस बैठक में सेना, नौसेना और वायुसेना के अधिकारी भी शामिल रहे और इस मुद्दे से निपटने की रणनीति पर अपने-अपने विचार रखे.

इस दौरान तीनों सेनाओं ने साइबर हमले से निपटने और जवाबी कार्रवाई करने की क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया गया. सूत्रों ने बताया कि हाल के दिनों में चीन और पाकिस्तान के हैकर ग्रुपों द्वारा भारतीय नेटवर्क को निशाना बनाने की घटनाएं बढ़ी हैं. ये हैकर भारतीय सैन्य ठिकानों की जानकारी चुराने के लिए साइबर हमले करते हैं.

सूत्रों के मुताबिक ऐसे साइबर हमलोंकी जवाबी कार्रवाई के लिए सेना की सिंग्नल कोर की यूनिटें हैं. हालांकि ये यूनिटें उस हिसाब से उपयोगी साबित नहीं हो रही हैं, जैसा कि सेना चाहती है.

पाकिस्तान और चीन के खिलाफ साइबर युद्ध शुरू करने के लिए सेना ने मिलिट्री इंटेलिजेंस कोर के तहत दो अलग यूनिटें गठित की है और सिंग्नल कोर के अधिकारियों को तैनात किया है. एक यूनिट आर्मी हेडक्वार्टर के तहत गठित की गई है, जबकि दूसरी पूर्वोत्तर सेक्टर में गठित की गई है. पहली फील्ड सर्विलांस यूनिट का नाम IFSU-1 है, जबकि दूसरी का नाम IFSU-2 है.

 

राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इन यूनिटों की सटीक लोकेशन को उजागर नहीं किया जा रहा है. पाकिस्तान और चीन की हैकिंग के खिलाफ जवाबी कार्रवाई करने के लिए इन दोनों यूनिटों को लगाया गया है. इसके अलावा ये यूनिटें हैकिंग के अपराधियों को पकड़ने और भारत या विदेश में उनकी लोकेशन का पता लगाने में भी मदद कर रही है.

इसके अलावा साइबर और भाषा विशेषज्ञ के रूप में महिला सैन्य अधिकारियों का एक बहुत बड़ा पुल तैयार करने की योजना में है. उच्च सैन्य सूत्रों की मानें तो यह पाया गया है कि महिला अधिकारी साइबर वॉरफेयर में अपने पुरुष कर्मियों से ज्यादा अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं. साइबर वॉर सेना के लिए आने वाले दिनों में एक बहुत बड़ी चुनौती है, क्योंकि आज के आधुनिक युग में कम्युनिकेशन नेटवर्क पर ही साइबर हमले किए जाते हैं.

हाल के दिनों में देखा गया है कि किस प्रकार चाइनीज और पाकिस्तानी हैकर्स ने भारतीय नेटवर्क में सेंध लगाने की कोशिश की थी. इसी प्रकार भाषा जानकार के तौर पर महिलाओं की विशेषता को देखा गया, तो पाया गया कि चाइनीज लैंग्वेज एक्सपर्ट्स की भारत में बहुत कमी है. सेना में महिलाओं का भाषा एक्सपर्ट्स का पूल इस कमी को दूर करने में मदद करेगा.

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