‘जीएसटी दरों में बहुलता एक चुनौती’

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पूर्व डिप्टी गर्वनर राकेश मोहन ने बुधवार को कहा कि जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) का क्रियान्वयन एक दशक से अधिक समय बाद हासिल किया गया एक बड़ा कार्य है, लेकिन दरों में बहुलता एक बड़ी चुनौती है। मोहन ने यहां पेंगुइन प्रकाशन द्वारा आयोजित ‘अर्थशास्त्र और प्रशासन’ कार्यक्रम में कहा, “जीएसटी को एक दशक के बाद हासिल किया गया है। दरों में बहुलता अभी भी एक चुनौती है।”

जीएसटी के तहत करों की दरें 5,12,18 और 28 फीसदी हैं, जबकि सोने पर कर की दर तीन फीसदी है।

इन दरों के अलावा लक्जरी और सिन वस्तुओं पर सेस लगाए जाते हैं, जिनमें महंगी कारें, बोतलबंद पेय और तंबाकू उत्पाद शामिल हैं।

आरबीआई के पूर्व अधिकारी ने कहा कि उच्च विकास दर हासिल करने के लिए भारत को स्वास्थ्य और शिक्षा पर ध्यान देने की जरूरत है।

उन्होंने कहा, “स्वास्थ्य और शिक्षा एक चुनौती है। हमारे पास सबसे खराब स्वास्थ्य एवं शिक्षा सूचकांक है। भारत इन क्षेत्रों में बड़ा सुधार किए बिना 10 फीसदी विकास दर हासिल नहीं कर सकता।”

उन्होंने कहा, “अगले पांच सालों में इन दो क्षेत्रों में सुधार करना सबसे बड़ी चुनौती है। कृषि को अब तक पूरी तरह से उपेक्षित किया गया है।”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *