राजीव कुमार से सीबीआई ने की चौथे दिन भी पूछताछ

शिलांग/कोलकाता : कोलकाता के पुलिस आयुक्त राजीव कुमार चिटफंड घोटाले से संबंधित मामलों में सीबीआई कार्यालय में मंगलवार को लगातार चौथे दिन भी पूछताछ का सामना करना पड़ा। राजीव कुमार सुबह साढ़े दस बजे से थोड़ी देर पहले सीबीआई
कार्यालय पहुंचे। उनसे शनिवार से पूछताछ हो रही है। इस संबंध में एक अधिकारी ने बताया कि राजीव से शारदा घोटाले में सबूतों से कथित छेड़छाड़ में उनकी भूमिका को लेकर पूछताछ की जा रही है।

राजीव से पिछले दो दिनों में तृणमूल कांग्रेस के पूर्व सांसद कुणाल घोष के साथ पूछताछ की गई। पूर्व सांसद को शारदा घोटाले में 2013 में गिरफ्तार किरा गरा था और वह 2016 से जमानत पर हैं। सीबीआई के एक अधिकारी ने बतारा कि घोष से पूछताछ पूरी हो चुकी है और उन्हें कोलकाता लौटने की अनुमति दे दी गई। वहीं, कोलकाता के पुलिस आरुक्त पिछले तीन दिनों में उच्च सुरक्षा वाले सीबीआई कार्रालर में 24 घंटे से अधिक समर गुजार चुके हैं। वह शारदा और रोज वैली चिटफंड घोटाले से संबंधित मामलों में सवालों का सामना कर रहे हैं। उच्चतम न्रारालर ने कुमार को सीबीआई के समक्ष पेश होने और जांच में पूरा सहरोग करने का निर्देश दिरा था। सीबीआई तब शीर्ष अदालत पहुंची थी जब वह 3 फरवरी को कुमार से पूछताछ करने उनके आधिकारिक आवास पहुंची थी, लेकिन कोलकाता पुलिस ने उसे ऐसा करने से रोक दिरा था। मुख्रमंत्री ममता बनर्जी ने तब सीबीआई के कदम के खिलाफ तीन दिन तक संविधान बचाओ धरना दिरा था।

कुणाल ने लगाए आरोप : इस बीच सीबीआई पूछताछ का सामना कर कोलकाता लौटे पूर्व सांसद व शारदा चिटफंड के आरोपी कुणाल घोष ने राजीव कुमार पर गंभीर आरोप लगाया। हवाई?अड्डे पर पत्रकारों से बातचीत में कुणाल ने कहा कि 10 तारीख को उनका राजीव संग सामना हुआ। सीबीआई ने 10 व 11 फरवरी को पूछताछ की। लेकिन इसके बाद ही राजीव ने पूछताछ में उठे एसआईटी अधिकारियों को फोन किया। सारे पूर्व एसआईटी अधिकारियों विधानगर के हैं। कुणाल ने आरोप लगाया कि इससे जांच प्रभावित होगी तथा अहम सबूत व तथ्य नष्ट होने का खतरा है। उन्होंने सीबीआई से जरुरी कार्रवाई करने की भी मांग की। कुणाल ने दावा किया कि सारे ऊंच्ची पहुंच वाले पुलिस अधिकारी ही नहीं है। लेकिन ऊंच्ची पहुंच वाले जांच को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। पूर्व तृणमूल सांसद ने कहा कि सीबीआई के सामने राजीव कुमार से अपनी बात कहने को वे अपनी नैतिक जीत मानते हैं जो उन्होंने पहले नहीं सुनी थी।

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