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बड़ाबाजार में कपड़ा व्यवसाय रहा बंद

कोलकाता : कपड़ा पर जीएसटी के विरोध में मंगलवार को कपड़ा व्यवसाय को बंद रखकर इस आंदोलन को और तेज किया गया। चेंबर ऑफ टेक्सटाइल ट्रेड एंड इडस्ट्रीज (कोट्टी) ने 11 जुलाई से 72 घंटे कपड़ा बाजार बंद का आह्वान किया है. यह निर्णय कोट्टी कार्यकारिणी समिति की बैठक में लिया गया। कोट्टी समर्थित सभी अन्य व्यापारिक संगठनों ने इस निर्णय को पूर्ण रूप से समर्थन मिलते हुए कपड़ा व्यवसाय को बंद रखा। आपको बता दे कि कोट्टी शुरु से ही जीएसटी के खिलाफ प्रदर्शन कर रही है और 15 जून और 28 से 30 जून तक दुकानें बंद रखी थी। इसपर कोट्टी के सचिव महेन्द्र जैन ने बताया की यह विरोध वस्त्र उद्योग पर लगाए जाने वाले कर के खिलाफ है और हम उसका शुरू से ही विरोध कर रहे हैं।

28 से 30 जून को भी पूरे भारत वर्ष में व्यापारियों ने अपनी दुकाने बंद करके विरोध प्रदर्शन किया था। रोटी कपड़ा मकान यह लोगों की मुख्य जरूरते है इनपर सरकार को कर नहीं लगाना चाहिए। उन्होंने बताया कि राणाघाट में सबसे ज्यादा कपड़ों का उत्पादन होता है जो कि जीएसटी के विरोध में पिछले 15 दिनों से बंद है। श्रमिक काम नहीं कर पा रहे है उनके रोजी रोटी पर सवाल उठ रहा है। हर प्रक्रिया में कर लगने से चीजो को दाम और बढ़ जाएगी। सरकार को नियम सरल बनाने पड़ेंगे। वहीं कोट्टी के अध्यक्ष अरुण भुवालका का कहना है कि जीएसटी पर इस बंद का वे समर्थन करते हैं। वस्त्र में कर लगाना बिल्कुल भी उचित नहीं है। सरकार को समझना चाहिए कि कई वस्त्र व्यापारी इतने पढ़े लिखे नहीं है जो जीएसटी के नए जटील प्रकिया को समझ सके और उनका मुनाफा भी उतना ज्यादा नहीं होता की किसी अकाउंटेंट को रखे।

जीएसटी के कारण सबका व्यापार बंद होने के कगार में आ गया है। कोट्टी के कार्यकरणी सदस्य बजरंग लाल खेरिया ने उन्होंने कहा कि इस बंद को ये ना समझा जाए कि व्यापारी कर नहीं देना चाहते कर देने में किसी को कोई आपत्ति नहीं है पर जो इसकी प्रकिया है वह इतनी जटिल है कि व्यापारियों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। छोटे व्यापरियों के लिए असल जिंदगी में इसे लागू करना नामुंकिन है। इसी मांग को लेकर व्यापारी दुकाने बंद करके विरोध कर रहे हैं। कोट्टी के कार्यकरणी सदस्य ओमप्रकाश पोद्दार ने कहा जीएसटी के खिलाफ वस्त्र व्यापारियों का विरोध जारी रहेगी जब तक सरकार कपड़ो पर जीएसटी हटा नहीं देती। 

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