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डीजल को जीएसटी में शामिल कराने के लिए सोमवार से ट्रक हड़ताल

ट्रांसपोर्टर 9-10 को करेंगे चक्का जाम

-जीएसटी में डबल टैक्सेशन का विरोध

-डीजल जीएसटी के तहत लाने की मांग

-आरटीओ द्वारा परेशान करने की शिकायत

-वाहन बीमा में लगातार वृद्धि का आरोप

-सड़क भ्रष्टाचार में इजाफे की शिकायत

कोलकाता  :  डीजल की कीमत में कमी व जीएसटी के चलते हो रही परेशानी के चलते ट्रांसपोर्टरों ने 9 व 10 अक्टूबर को टोकन स्ट्राइक की घोषणा की है। ट्रांसपोर्टरों ने कई अन्य मांगों के साथ ही डीजल को भी जीएसटी के तहत लाने की मांग की है। उनका कहना है कि पूरे देश में डीजल की कीमत एक होनी चाहिए तथा रोजाना कीमत तय न कर इसे तीन माह में निर्धारित किया जाय। ट्रांसपोर्टरों ने जीएसटी के तहत पहले से तय 5 फीसदी आरसीएम के बावजूद 12 फीसदी एफसीएम लागू करने का भी विरोध किया है। उनका आरोप है यह दोहरी टैक्सेशन प्रक्रिया है, जो गलत है। कलकत्ता गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन की ओर से शनिवार को पत्रकारों को बताया गया कि वे एआईटीडब्लूए, एआईएमटीसी सह दूसरे केंद्रीय ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन द्वारा 9-10 अक्टूबर को आहूत टोकन स्ट्राइक का समर्थन करते हैं। एसोसिएशन ने कहा कि केंद्र सरकार से इस बारे में कई दफे बात हुई, संतोषजनक उत्तर नहीं मिलने के बाद यह फैसला लिया गया। एसोसिएशन के वीपी पीके मित्तल ने कहा कि जीएसटी के बाद आरटीओ का काम बंद हो गया है, लेकिन उन्होंने कमाने का दूसरा तरीका इजाद कर लिया है। ट्रांसपोर्टरों को बिना कारण उन्हें काफी रकम चुकता करनी पड़ रही है।

मित्तल ने कहा कि केंद्र के फैसले से छोटे व मझोले ट्रांसपोर्टरों के लिए व्यवसाय में बने रहना कठीन होता जा रहा है। सरकार को इरादा विदेशी निवेशकों को आकर्षित करना है। उनके आने से 2-10 ट्रक मालिकों के लिए बाजार में बने रहना असंभव हो जाएगा। डीजल की कीमत में 2 रुपए की कमी को मित्तल ने केवल दिखावा बताया। उन्होंने कहा कि कृषि के बाद ट्रांसपोर्ट देश का दूसरा सबसे बड़ा अंसगठित क्षेत्र है जिसमें प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से 20 करोड़ से अधिक लोग जुड़े हैं। लेकिन केंद्र सरकार इसे भी कृषि की तरह बर्बाद करने पर तुली है। मित्तल ने जीएसटी के प्रावधानों में नोटिफिकेशन मात्र से बदलाव पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसे संसद में पारित किए बिना केवल नोटिफिकेशन जारी कर कैसे संशोधित जा सकता है??जीएसटी काउंसिल को इसका अधिकार क्या है??बस व टैंकर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष शोहन सिंह ने कहा कि सरकार वाहनों की थर्ड पार्टी बीमा मेंलगातार वृद्धि कर रही है। यह सालान 20 फीसदी से भी अधिक है। यह छोटे वाहन कारोबारियों को परेशान करने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सड़कों पर भ्रष्टाचार बढ़ गया है। आरटीओ के भ्रष्टाचार को रोकने के लिए केंद्र सरकार को एसआईटी का गठन करना चाहिए जिससे उन्हें सड़कों से हटाया जा सके। वाहनों को बगैर किसी विशेष सूचना के रास्ते में नहीं रोका जाना चाहिए। सीजीटीए(ना. कमेटी) के चेयरमैन प्रमोद कुमार गुप्ता ने कहा कि जीएसटी के चलते आपरेटिंग कास्ट में 30 फीसदी की गिरावट का केंद्र का दावा गलत है। सरकार का इरादा विदेश पूंजि निवेश को आकर्षित कर देशी कारोबारियों को खत्म करने जैसा लगता है।

सीजीटीए एक नजर  :  सीजीटीए 60 साल पुरानी ट्रांसपोर्टरों की एपेक्स बॉडी है जिसके कोलकाता व राज्य में 500 सदस्य हैं। यह एआईएमटीसी से संबद्ध है जो लगभग 93 लाख ट्रक व 50 लाख टूरिस्ट बस व ऑपरेटरों का प्रतिनिधित्व करती है। एसोसिएशन का कहना है कि नोटबंदी के दौर में इसने नगदी के बिना भी लोगों तक सेवा पहुंचाई तथा अभी भी इससे उबरने की कोशिश कर रही है। एसोसिएशन अब जीएसटी के साथ सामंजस्य बैठाने क कोशिश कर रही है, लेकिन केंद्र सरकार मदद नहीं कर रही है।

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