Facebook अपने मैसेंजर में लाने जा रहा है ये खास फीचर

मैसेंजर के यूजर इंटरफेस (UI) में अलग-अलग बदलाव लाने के लिए एक्सपेरिमेंट करने के बाद फेसबुक अब कुछ देशों में मैसेजिंग ऐप और प्लेटफार्म पर ‘डार्क मोड’ की टेस्टिंग कर रहा है. फेसबुक मैसेंजर के एक अरब से ज्यादा मंथली एक्टिव यूजर्स हैं. साल 2018 के मई में कंपनी के F8 डेवलपर्स कॉन्फ्रेंस में मैसेंजर टीम ने घोषणा की थी कि वो ऐप्लिकेशन की रिडिजाइनिंग पर काम कर रही है.  

एंड्रॉयड पुलिस की रिपोर्ट में कहा गया, ‘इस फीचर का टेस्टिंग फिलहाल अमेरिका में नहीं हो रही है. अगर आप उन देशों में रहते हैं, जहां इस फीचर का टेस्टिंग हो रही हो तो ऐप के Me सेक्शन में एक नया ‘डार्क मोड सेटिंग’ का ऑप्शन मिलेगा.’

सोशल नेटवर्किंग दिग्गज ने साल 2018 के अक्टूबर में हुए F8 सालाना डेवलपर्स कॉन्फ्रेंस में एक नए, सरल UI वाले मैसेंजर 4 की घोषणा की थी. तभी इसमें ‘डार्क मोड’ लॉन्च किए जाने का अनुमान लगाया जा रहा है. गूगल ने ये भी पुष्टि की है कि एंड्रॉयड फोन्स पर ‘डार्क मोड’ में कम पावर का यूज होगा है और बैटरी लाइफ ठीक रहेगी. डार्क मोड से ऑपेरटिंग सिस्टम या ऐप का ओवरऑल कलर थीम ब्लैक कलर को हो जाएगा.

लोकेशन ऑफ करने के बाद भी आपको ट्रैक करता है फेसबुक

फेसबुक से जुड़ी दूसरी खबर की बात करें तो हाल ही में एक रिसर्चर ने दावा किया है कि लोकेशन ऑफ के बाद भी फेसबुक आपको ट्रैक करता है. अमेरिकी रिसर्चर ने हाल ही में यह पाया है कि फेसबुक को लोकेशन ट्रैकिंग से रोकने का कोई तरीका ही नहीं है. अकाउंट ही डिलीट कर देना अलग बात है.

रिसर्चर ने कहा है कि अगर आप फेसबुक ऐप के लिए लोकेशन ऑफ कर लेते हैं फिर भी हर संभावित तरीके से फेसबुक आपकी लोकेशन ट्रैक करने की कोशिश में लगा रहता है. रिसर्चर ने कहा ऐसा इसलिए है क्योंकि फेसबुक का मॉडल विज्ञापन बेस्ड है और वो इसके लिए यूजर की प्राइवेसी को भी दांव पर लगा सकता है. ऐसा हाल के कुछ लीक और डेटा ब्रीच में भी पाया गया है.

यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ कैलिफोर्निया के कंप्यूटर साइंस के असिस्टेंट प्रोफेसर ऐलेक्जेंड्रा कोरोलोओ ने मीडियम पर इस बारे में विस्तार से जानकारी दी है. यहां बताया गया है कि कैसे फेसबुक उनके लोकेशन पर आधारित टार्गेटेड विज्ञापन देता है, जबकि उन्होंने न तो प्रोफाइल में अपनी लोकेशन डीटेल्स डाली है और न ही लोकेशन ऑन किया है. इतना ही नहीं उन्होंने हर तरह संभव प्रयास किए जिससे लोकेशन शेयर न हो.

कोरोलोवा का कहना है कि उन्होंने फेसबुक ऐप में लोकेशन हिस्ट्री भी ऑफ कर लिया था और iOS की सेटिंग्स में भी उन्होने फेसबुक के लिए लोकेशन ऐक्सेस को डिसेबल कर लिया था. इसके अलावा उन्होंने ने अपने शहर और किसी भी तरह के लोकेशन टैग्ड फोटो और कॉन्टेंट फेसबुक प्रोफाइल पर नहीं अपलोड किया. इसे बावजूद लगातार उन्हें उनके घर और दफ्तर के लोकेशन के आधार पर विज्ञापन दिए गए. कोरोलोवा के मुताबिक फेसबुक पर दिया गया लोकेशन कंट्रोल एक भ्रम है और ये असल में ये कंट्रोल है ही नहीं.

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