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चार दिन के प्रवास से चतुर्मास व्रत की ओर

हावड़ा, समाज्ञा रिपोर्टर 
उत्तर हावड़ा के नागरिक वृंद संत शिरोमणि महातपस्वी आचार्य महाश्रमण जी के ज्ञान की अविरल धारा से अभिभूत होकर अपने जीवन को धन्य मान रहा है। चार दिनों के प्रवास के दौरान श्रावकों ने आचार्य श्री की ज्ञान-गंगा में पूर्ण निमज्जन कर यहीं से तैयारी कर ली चतुर्मास व्रत की। गुरु की प्रेरणा से ज्ञान-चक्षु खुल जाते हैं और भक्ति का मार्ग प्रशस्त हो जाता है। वेद के कर्मकाण्ड भाग में भी वर्णित है जो लोग चतुर्मास व्रत करते हैं वे अमर तथा सप्त सुखी रहने के अधिकारी हो जाते हैं। सतगुरु आचार्य श्री महाश्रमणजी के कृपापात्र श्रावक, श्राविकाओं ने चतुर्मास व्रत की तैयारी श्ाुरू कर दी है।
महान परिव्राजक आचार्य श्री तुलसी सम्पूर्ण श्रमण परंपरा के अद्वतीय तेजपुंज थे। आपके तेजस्वी, ओजस्वी एवं वर्चस्वी व्यक्तत्व को जैन धर्म को व्यापकता प्रदान की है। आचार्य तुलसी एक व्यक्ति के रूप में संस्कृत थे। वे परंपरा के पोषक होते हुए भी नवीनता को सविवेक अपनाने में पुरोधा पुरुष थे। उनकी इस नई सोच ने ही तेरापंथ धर्म को विकास के नए आयाम प्रदान किए। जैन धर्म को जन धर्म बनाने का उनका सपना यथार्थ के धरातल पर फलवान बना है। आचार्य श्री तुलसी अणुव्रत के प्रवर्तक थे। उन्होेंने स्वतंत्र भारत को नैतिक भारत बनाने के लिए अणुव्रत का शंखनाद किया। 58 वर्ष पूर्व कोलकाता में तेरापंथ धर्मसंघ के 9वें आचार्य युगप्रधान आचार्य श्री तुलसी का पदार्पण हुआ। आज उस महामना की पुण्यतथ पर समूचा समाज श्रद्धानवत है। उनकी छाया स्वरूप आचार्य श्री महाश्रमण जी का कोलकाता पदार्पण गुरु तुलसी चातुर्मास के इतिहास को दोहरा रहा है। आचार्य श्री महाश्रमण जी के सान्निध्य में गुरुदेव तुलसी की 21वीं पुण्य तथ का कार्यक्रम समायोजित किया गया। आचार्य श्री महाश्रमण जी ने पूज्य गुरुदेव आचार्य श्री तुलसी के बारे में प्रेरणादायी उद्बोधन दिया। साध्वी प्रमुखाश्री कनक श्रीजी, मुख्यनयोजका साध्वी विश्रुत विभा जी, साध्वी वर्याजी, मुख्यमुनि, मुनिश्री कुमारश्रमणजी एवं समणी कुसुमप्रज्ञाजी ने अपनी भावंजल प्रेषित की। साध्वीवृन्द द्वारा भावपूर्ण गीतका का संगान किया। ऋषभ महिला मंडल, प्रज्ञा मंडल, उत्तर हावड़ा महिला मंडल एवं महासभा के उपाध्यक्ष विमल बैद आद ने गुरुदेव श्रीतुलसी को भावंजल दी। सभी संस्थाओं के पदाधिकारयों ने अपनी श्रद्धाभरी भावनाएं उस महामना के प्रति समर्पित की। गणाधपत आचार्य तुलसी के स्वार्गारोहण दवस के उपलक्ष्य में श्रद्धांजलि समारोह कार्यक्रम आयोजन हुआ। संघगायक कमल सेठया, मनाक्षी भूतोड़िया, नवीन नोलखा, देवेन्द्र बैंगानी ने गुरुदेव तुलसी को भावांजलि देते हुए सुमधुर गीतों का संगान किया। उपरोक्त जानकारी प्रवास व्यवस्था समिति की महामंत्री सूरज बरड़िया ने दी। कार्यक्रम को सफल बनाने में सभा अध्यक्ष जतन लाल पारख, उपाध्यक्ष ज्ञानचंद मुसरफ, मंत्री राकेश संचेती, सहमंत्री संदीप कोचर, संगठन मंत्री उम्मेद सेठिया, कोषाध्यक्ष जेठमल श्यामसुखा, जगत सिंह टांटिया, संजय सेठिया, कुलदीप लुनिया, मनोज सिंघी, आनंद पारख, धमेंद्र बुच्चा, रमेश गोलछा, सुशील गर्ग, संजय बच्छावत, राजेंद्र पिंचा आदि सक्रिय थे।

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