बच्चों को खुलकर जीने और उड़ने दें

बच्चे तो बच्चे होते हैं। उन्हें उनका बचपन खुलकर जीने दें और उसके साथ ही उन्हें उड़ने भी दें। अक्सर इग्जाम टाइम आते ही विद्यार्थी और माता-पिता दोनों के ही चेहरे पर तनाव आने लगता है। इससे घर का माहौल भी बदल जाता है। माता-पिता अपने बच्चों को फोकस, कॉन्फिडेंट और हार्ड वर्क जैसी बातें लगातार सिखाने में लगे रहते हैं, लेकिन क्या वाकई वे इसे इंप्लीमेंट कर पाते हैं? अधिकांश का उत्तर होगा नहीं? अब प्रश्न उठता है कि ऐसे में अच्छी परफॉर्मेंस देने के लिए क्या करें कि बच्चे बिना प्रेशर, भय व तनाव के परीक्षाओं का सामना कर सकें। इसके लिए उन्हें सही वक्त पर सही सोचने का तरीका सिखाना होगा।

हमें बचपन से बोल-चाल व व्यवहार की शिक्षा दी जाती है, लेकिन सोचने की नहीं। हम सोचने के तरीके सिखाने की बात को गंभीरता से नहीं लेते, जबकि सोचने का सही तरीका ही हमें जिंदगी के हर मोड़ पर विपरीत परिस्थतियों से सामना करना सिखाता है। अपने बच्चों को थिंक टैंक बनाना है तो सोचने का सही तरीका सीखना ही होगा। मेरे अनुभवों ने मुझे सोचने के बड़े तरीकों पर काम करने की प्रेरणा दी है। मैं अब थॉट टेक्नोलॉजी पर काम कर रही हूं, जिससे समाज को बेहतर और सुरक्षित बनाया जा सके। मेरा मानना है कि दुनिया की बड़ी से बड़ी समस्या सही सोच से सुलझाई जा सकती है। कुछ ही समय बाद मोबाइल और कम्प्यूटर को की-वर्डस की जगह डायरेक्ट थॉट्स से ऑपरेट किया जा सकेगा।

परीक्षा के दौरान कुछ यूं सोचें
-हर विचार महत्वपूर्ण है, उसे वेस्ट न जाने दें। उसे सही चैनलाइज करके वैल्यूएबल बनाएं।
-एक निगेटिव विचार बैक्टीरिया की तरह फैलता है, उसे पनपने से पहले ही खत्म कर दें।
-सिर्फ पॉजिटिव विचार मन में लाएं और खुद को अच्छा परफॉर्म करता हुआ महसूस करें।
-खुद पर विश्वास रखते हुए सेल्फ मोटिवेट रहें।
-डर लगे तो जो बातें आपको सच्ची खुशी देती हैं, उनके बारे में सोचें। ऐसा करने से ब्रेन में हैप्पी केमिकल क्रिएट होंगे, जो आपको पॉजिटिविटी की ओर ले जाएंगे।
-भय या तनाव मन में आए तो ध्यान दूसरी और डायवर्ट कर दें।
-हर 1 घंटे में खुद के विचारों की जांच करें।
– स्टॉप-चैक-चेंज टेक्निक अपनाएं।
– खुद को पॉजिटिविटी से चेंज करने के लिए अपना चार्जर ढ़ूंढ़े।
– टाइम को स्मार्टली मैनेज करें, साधारण भोजन और भरपूर नींद का प्रयास करें।
– खुद की तुलना खुद से करें, किसी दूसरे से नहीं।
– पूरे दिनभर में दो वक्त काफी महत्वपूर्ण होते हैं, सोने के पहले और सुबह उठने के बाद।
– इस समय खुद को पॉजिटिव विचारों से चार्ज करें।
– परीक्षा के दौरान माता-पिता से मेरा अनुरोध है कि वे भी अपने थॉट्स की जांच करते रहें और बच्चों को लेकर पॉजिटिव सोचें। आपकी सोच आपके बच्चों की परफॉर्मेंस के लिए जरूरी है।

 

BIPIN BIHARI RAI

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *