World Malaria’s Day पर जाने कि कैसे आते है मलेरिया की चपेट में और कैसे करे बचाव?

मलेरिया सुनने में बहुत सामान्‍य सी एक बीमारी लगती है, जिसे लोग ज्‍यादात्‍तर मौसमी बीमारी समझकर लापरवाही बरतते है और अक्‍सर इसकी चपेट में आ जाते है। आप को जानकर थोड़ी सी हैरत होगी कि दुनिया की आबादी के एक बड़े हिस्से के लिए मलेरिया बहुत बड़ा मुद्दा बन गया है।

यहीं कारण है लोगों को इसके प्रति जागरुक करने के लिहाज से हर साल 25 अप्रैल को विश्वभर में मलेरिया दिवस मनाया जाता है। विश्‍व स्‍वास्‍थय संगठन द्वारा इस दिन को मनाने का उद्देश्य मलेरिया जैसे रोग पर जनता का ध्यान केंद्रित करना था, जिससे हर साल लाखों लोग मरते हैं। इस मुद्दे पर विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम चलाने से बहुत सी जानें बचाई जा सकती हैं।

WHO की एक रिपोर्ट के अनुसार बीमारियों से होने वाली मौतों में सबसे ज्यादा मौतें मलेरिया की वजह से होती है। जलवायु परिवर्तन के चलते लगातार तापमान बढ़ रहा है और इसी के साथ मलेरिया का खतरा भी बढ़ गया है। शोधकर्ताओं के मुताबिक़ तापमान बढ़ने के कारण मलेरिया के मरीज़ों की संख्या तेज़ी से बढ़ी है। विश्‍व मलेरिया दिवस के मौके पर जानते है कि किस तरह मलेरिया फैलता है इसके लक्षण और इसके बचाव के बारे में।

एनोफिलीज’ मच्छर से फैलता है मलेरिया

मलेरिया एक ऐसा रोग है जो मादा ‘एनोफिलीज’ मच्छर के काटने से होता है। यह मच्छर गंदे और दूषित पानी में पनपते हैं, इस मादा मच्‍छर के काटने पर मलेरिया की सम्‍भावनाएं बढ़ जाती है। डेंगू के मच्छर का काटने का समय जहां सूर्यास्त से पहले होता है वहीं, मलेरिया फैलाने वाले मच्छर सूर्यास्त के बाद काटते हैं। इन्हीं सब चीजों के प्रति सचेत रहने और खुद को इस रोग से बचाने के लिए आमतौर पर मलेरिया का रोग अप्रैल से शुरू हो जाता है लेकिन जुलाई से नवंबर के बीच में यह रोग अपने चरम पर होता है। यानि कि इसी दौरान लाखों लोग इसकी चपेट में आते हैं।

एक से 4 हफ्ते के बीच में दिखते है लक्षण

अगर आपको मलेरिया हो जाता है, तो फौरन इलाज करवाए। इस बात को ध्यान में रखिए कि मलेरिया के मच्छर के काटने के 1 से 4 हफ्ते बाद बीमारी के लक्षण नज़र आ सकते हैं। ये होते है इसके लक्षण। तेज़ बुखार, पसीना, ठंड और कँपकँपी, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, थकान, जी मचलना, उल्टी, दस्त और अगर मलेरिया का इलाज न करवाया जाए, तो शरीर में खून की भारी कमी हो सकती है और जान भी जा सकती है। इससे पहले कि हालत और खराब हो, जल्द-से-जल्द इलाज करवाएं, खासकर जब बच्चों या गर्भवती स्त्रियों की तबीयत खराब हो।

गर्भावस्‍था में रखे खास ख्‍याल

डेंगू की ही तरह मलेरिया होना भी प्रेगनेंसी के दौर में बहुत खतरनाक है। इससे गर्भपात जैसी गंभीर समस्याएं भी हो सकती हैं। इसके अलावा मलेरिया के कारण गर्भवती महिलाओं को एनीमिया, किडनी फेल होना और कई महत्वपूर्ण अंगो के डैमेज होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसके कारण महिला की मौत भी हो सकती हैं इसलिए इस रोग के लक्षणों को बिल्कुल भी अनदेखा न करें।

मलेरिया होने पर ये खाएं

चाय, कॉफी व दूध लें। चाय में तुलसी के पत्तें काली मिर्च, दालचीनी या अदरक डाल कर पियें। मलेरिया के रोगी को सेब खिलाएं, यह मलेरिया में फायदा करता है।दाल-चावल की खिचड़ी, दलिया, साबूदाना का सेवन करें। ये पचने में आसान होते हैं और पोष्टिक भी होते हैं। नीबू को काटकर उस पर काली मिर्च का चूर्ण व सेंधा नमक डालकर चूसें, स्वाद ठीक होगा और फायदा भी पहुंचेगा। मलेरिया ज्वर में अमरूद खाने से रोगी को लाभ होता है।

 
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