तलाक की प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती

हरिद्वार। तलाक को लेकर देश में छिड़ी बहस के बीच एक महिला ने पूरी प्रक्रिया को ही सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी है। महिला ने पति पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाते हुए तलाक की प्रक्रिया को गलत बताया।

महिला ने पति पर बिना उसकी सहमति के एकतरफा तलाक देने का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। महिला फिलहाल दो पुत्रियों के साथ अपने मायके में रह रही है।

याचिका में महिला ने पति के अलावा केंद्र सरकार के तीन मंत्रालयों के साथ ही दारूल उलूम देवबंद को भी प्रतिवादी बनाया है।

याचिकाकर्ता सहारनपुर (उत्तर प्रदेश) हाल निवासी लक्सर कोतवाली के सुल्तानपुर गांव निवासी अतिया साबरी के अनुसार निकाह व तलाक के समय पति-पत्नी की सहमति आवश्यक होती है।

लेकिन उसके पति ने उसकी सहमति के बगैर ही उस पर गलत आरोप लगाते हुए एकतरफा तलाक दे दिया। यहां तक कि तलाकनामा भी उसे प्राप्त नहीं हुआ।

उसके पति व ससुर ने दारूल उलूम देवंबद से उक्त तलाकनामे पर फतवा भी प्राप्त कर लिया। दारूल उलूम की ओर से भी उसके तलाक को वैध बताने से पूर्व उसका पक्ष नहीं जाना गया।

वादी आतिया साबरी की ओर से उक्त मामले में आठ जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। इसमें उसने पति व ससुर के अलावा दारूल उलूम देवबंद व बाल कल्याण एवं विकास मंत्रालय, कानून एवं न्याय मंत्रालय तथा अल्पसंख्यक मंत्रालय को भी प्रतिवादी बनाया है।

कोर्ट की ओर से 23 जनवरी को याचिका स्वीकार करते हुए मामले पर सुनवाई के लिए 15 फरवरी की तारीख तय की गई है। मामले में सभी पक्षकारों को नोटिस जारी किए गए हैं।

यह है मामला

सुल्तानपुर निवासी आतिया साबरी पुत्री मजहर हसन का निकाह 25 मार्च 2012 को लक्सर कोतवाली के जसोदरपुर गांव निवासी सईद अहमद के पुत्र वाजिद के साथ हुआ था। शादी के बाद उसकी दो पुत्रियां हुई। आरोप है कि पुत्री होने से उसके ससुराल वाले नाखुश थे। आरोप है कि ससुराल पक्ष के लोगों ने उसकी छोटी पुत्री को गर्भ में ही मारने का प्रयास भी किया। इसके बाद दो नवंबर 2015 को उसके पति की ओर से उसे एकतरफा तलाक दे दिया गया।

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