बजट 2017: मध्यम वर्ग, छोटे उद्योगों को कर राहत, कालेधन पर कसा शिकंजा

वर्ष 2017—18 के आम बजट में नोटबंदी से सुस्त पड़ी अर्थव्यवस्था में नई जान फूंकने के लिये निम्न मध्यम वगीर्य नौकरी पेशा लोगों को आयकर में राहत और छोटे उद्योगों के लिये कंपनी कर में कटौती सहित अनेक उपायों की घोषणा की गई है। किसानों की आय दोगुना करने, साफ-सफाई, बिजली, रेलवे, सड़क सहित जरूरी ढांचागत सुविधायें उपलब्ध कराने और युवाओं को शिक्षा, कौशल विकास के साथ रोजगार के अवसर दिलाने के लिये अनेक पहल की गई हैं।

इस बार के आम बजट में रेलवे बजट को भी मिलाया गया है। इस लिहाज से यह ऐतिहासिक बजट है। इसके साथ ही आमतौर पर फरवरी के अंत में बजट पेश किया जाता है लेकिन इस बार इसे फरवरी माह के शुरू में ही पेश किया गया।

टैक्स दरों में बदलाव

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने उत्तर प्रदेश, पंजाब सहित पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों से पहले पेश इस बजट में ढाई लाख से पांच लाख रुपये के सालाना आय वर्ग में कर की दर मौजूदा 10 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत कर दी। उन्होंने कहा कि इस रियायत से पांच लाख रुपये से कम सालाना आय वाले व्यक्तियों की कर देनदारी अन्य छूट सहित या तो शून्य रह जायेगी अथवा उनकी मौजूदा देनदारी का आधी रह जायेगी। इस कटौती से 15,500 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान होगा।

वित्त मंत्री ने 50 लाख से एक करोड़ रुपये की वार्षिक कमाई करने वालों के आयकर पर 10 प्रतिशत की दर से अधिभार लगा दिया। एक करोड़ रुपये से अधिक कमाई पर 15 प्रतिशत की दर से मौजूदा अधिभार पूर्ववत लागू रहेगा। इससे सरकार को 2,700 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राजस्व प्राप्ति होगी। वित्त मंत्री ने कहा कि पांच लाख रुपये से कम की वार्षिक आय पर कर दरों में की गई कमी का लाभ पांच लाख रपये से उपर की आय वर्ग के करदाताओं को भी मिलेगा। वित्त मंत्री का यह बजट कई मायनों में एतिहासिक रहा है। पहली बार आम बजट के साथ ही रेल बजट को मिलाकर पेश किया गया है। फरवरी अंत के बजाय पहली फरवरी को बजट पेश किया गया जिसमें ढांचागत योजनाओं के लिये 3,96,135 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया। रेलवे के लिये 1,30,000 करोड़ रुपये और राजमार्गों के लिये 64,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है।

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