कोच की रेस में पिछड़े सहवाग, इनके 2019 विश्व कप तक कोच रहने की उम्मीद

लंदन: भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआइ) के कुछ पदाधिकारी सेल्फ गोल करने यानि बोर्ड को ही नुकसान पहुंचाने में माहिर हैं। ऐसे ही एक पदाधिकारी के कारण भारतीय टीम के कोच को लेकर पूरा विवाद खड़ा हुआ। 

खिलाड़ियों की वार्षिक करार की राशि दोगुनी होने के बावजूद मुख्य कोच अनिल कुंबले का सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त प्रशासकों की समिति (सीओए) के समक्ष अपनी तनख्वाह 6.5 से 7.5 करोड़ रुपये करने और खिलाड़ियों की करार राशि को फिर से बढ़ाने का प्रस्ताव देना बीसीसीआइ के एक पदाधिकारी को अच्छा नहीं लगा। इसके बाद उसने अंदर की कुछ बातें मीडिया में लीक कर दीं, जिससे तिल का ताड़ बन गया। 

यही नहीं, उसने बीसीसीआइ के कार्यवाहक सचिव को भी इस बात के लिए मना लिया कि चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान ही कोच का चयन हो जाए और वेस्टइंडीज दौरे पर कोच को नया करार मिल जाए। हालांकि उस पदाधिकारी को भी नहीं पता था कि विवाद इतना बड़ा हो जाएगा। वह सिर्फ कुंबले को उसकी जगह दिखाना चाहते थे।

विवाद ज्यादा बढ़ने और चैंपियंस ट्रॉफी जैसे महत्वपूर्ण टूर्नामेंट के बीच टीम इंडिया के लिए नया कोच चुनने की नीति ने सब जगह बीसीसीआइ की बदनामी करा दी। इसी को देखते हुए बीसीसीआइ के कार्यवाहक अध्यक्ष सीके खन्ना और आइपीएल चेयरमैन राजीव शुक्ला ने दखल दिया। 

दैनिक जागरण ने पहले ही बताया था कि खन्ना ने गुरुवार को अमिताभ को ईमेल लिखकर कोच की खोज को 26 जून तक होने वाली बोर्ड की विशेष आम सभा (एसजीएम) तक टालने का सुझाव दिया। इसके बाद भारतीय समयानुसार गुरुवार की देर रात यहां लंदन में हुई सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली और वीवीएस लक्ष्मण की क्रिकेट सलाहकार समिति (सीएसी) ने भी मुख्य कोच अनिल कुंबले के भविष्य पर फैसला करने के लिए और समय देने की मांग की। तीनों ने नए कोच की नियुक्ति पर लगभग दो घंटे तक चर्चा की और फिर बीसीसीआइ सीईओ राहुल जौहरी को सूचित किया कि उन्हें अभी कुछ और समय चाहिए। इसके बाद अमिताभ ने कहा कि सीएसी ने मुख्य कोच के चयन के संदर्भ में चर्चा की। उन्होंने बीसीसीआइ से अतिरिक्त समय मांगा है। 

खन्ना और राजीव शुक्ला सहित कई सीनियर सदस्य जल्दबाजी में कुंबले को हटाने के खिलाफ हैं और ऐसे में इस दिग्गज स्पिनर का कार्यकाल बढ़ाए जाने की संभावना बढ़ गई है। सीएसी के अतिरिक्त समय मांगने के बाद कुंबले का वेस्टइंडीज दौरे पर भी भारतीय टीम के साथ जाना तय हो गया है। चैंपियंस ट्रॉफी 18 तारीख तक है और 20 को टीम इंडिया को वेस्टइंडीज रवाना होना है। कुंबले के कोच रहते हुए भारत ने 17 में से 12 टेस्ट मैच जीते हैं। अगर कुंबले नहीं जाते हैं तो सहायक कोच संजय बांगड़ को उनकी भूमिका निभानी पड़ सकती है। हालांकि ऐसी स्थिति आने की उम्मीद नहीं है। खन्ना ने इसके साथ ही यह बात भी साफ की है कि अब जो भी कोच चुना जाएगा उसका कार्यकाल 2019 विश्व कप तक होगा। हालांकि जो संकेत मिल रहे हैं उसके हिसाब से तो कुंबले के ही कोच बने रहने की संभावना बढ़ गई है। क्योंकि एक पदाधिकारी के अलावा कोई भी वीरेंद्र सहवाग को कोच बनाने के पक्ष में नहीं है।

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