कर्नल का नरेंद्र मोदी सरकार को नोटिस- मुफ्त राशन बंद करने का फैसला बदला नहीं तो ले जाऊंगा कोर्ट

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के पीस जोन में तैनात सुरक्षाबलों को मुफ्त राशन दिए जाने के फैसले पर रोक लगाने के बाद एक सैन्य अधिकारी ने सरकार को नोटिस भेजा है। अधिकारी ने रक्षा सचिव संजय मित्रा के जरिए यह नोटिस भिजवाया है। नोटिस में इस फैसले को 60 दिनों के भीतर वापिस लेने को कहा गया है। राजस्थान में सेना की लीगल विंग में डेप्यूटी जज कर्नल मुकुल देव ने यह नोटिस केंद्र सरकार को भिजवाया है। केंद्र सरकार ने जुलाई महीने से जवानों के लिए मुफ्त राशन के बजाए 96 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से नकदी देने का फैसला लिया था। इस फैसले के खिलाफ मुकुल देव ने नोटिस दिया है और मांग की है कि अगर इस फैसले को बदला नहीं जाता तो वह कोर्ट जाएंगे। शांतिपूर्ण और मैदानी इलाकों में तैनात सेना के जवानों को मुफ्त राशन पहुंचाया जाता है।

टाइम्स ऑफ इंडिया को कर्नल देव ने बताया कि 1 जुलाई को भेजे गए नोटिस में उन्होंने कहा, “राशन के बदले नकदी देने का कोई प्रवधान कानून में नहीं है। यह अवैध आदेश मेरी(कर्नल देव) सेवा के बुनियादी नियमों और शर्तों का उल्लंघन करता है।” इसके अलावा कर्नल देव ने कहा कि सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 80 के तहत, वह संयुक्त राष्ट्र लोक सेवा आयोग के विज्ञापन/अधिसूचना की संयुक्त रक्षा सेवा परीक्षा पास कर के 1988 में सेना में शामिल हुए थे। “अधिसूचना में स्पष्ट रूप से सेवा की अन्य शर्तों और शर्तों के अलावा, मुफ्त राशन का प्रावधान था। मुफ्त राशन के बदले में नकदी के प्रावधान का कोई जिक्र नहीं था

रिपोर्ट्स के मुताबिक सेना के कई अधिकारी इस फैसले का विरोध कर चुके हैं। अधिकारियों का मत है कि मुफ्त राशन एक छोटे परिवार के खाने की लगभग सभी जरूरतें पूरी हो जाती हैं लेकिन हर कैश देने से बात नहीं बनेगी। हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में ल्यूटिनेंट जनरल (retd) एसपीएस कटेवा ने भी बताया कि 96 रुपये एक छोटी राशि है। कटेवा ने आगे बताया, “तय की गई राशि की तुलना बाजार के दाम से करें तो यह कम है। मेरे हिसाब से 250 रुपये के करीब रेट तय करना ज्यादा बेहतर होता।”

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