समाज्ञा

कभी ‘पड़ाका’ खाया है आपने? गोलगप्पे तेरे कितने नाम!

चौंक गए ना! पड़ाका से पटाखाका कन्फ्यूजन होता है या फिर झापड़ यानी तमाचे का। क्योंकि कई जगह तमाचे को पड़ाका भी कहते हैं, लेकिन हम बात कर रहे हैं महिलाओं की बेहद पसंदीदा और चटपटी डिश गोलगप्पे की। जी हां! गोलगप्पे देश भर में कई अलग-अलग नामों से जाने जाते हैं, जिनमें से इनका एक नाम पड़ाका भी है

पड़ाका – उत्तरप्रदेश में अलीगढ़ गोलगप्पे को पड़ाका के नाम से जाना जाता है। यहां आटे और सूजी के पड़ाके तरह-तरह के मसालों वाले अलग अलग तरह के पानी के साथ सर्व किए जाते हैं। यहां भरावन कीबजाय पानी के स्वाद पर ही जोर ज्यादा दिया जाता है। कई जगह पड़ाकों में बिना कुछ भरे सिर्फमसालेदार पानी डालकर खाया-खिलाया जाताहै।

पकौड़ी – गुजरात के कुछ हिस्सों में गोलगप्पे पकौड़ी कहलाते हैं। भरावन के रूप में इस्तेमाल की जानेवाली सामग्री भी जरा हट कर होती है। कई जगहों पर इसमें बेसन केलच्छे, मीठी चटनी और कच्चेप्याज डाले जाते हैं,तो कहीं कहीं इसमें छोटे-छोटे कटे हुए उबले आलू और उबली हुई साबुत हरी मूंग की फिलिंग भी की जाती है। जिसे खजूर की चटनी के साथ खाने पर मजा आ जाता है।

पुचका – भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में गोलगप्पे को पुचका के नाम से जाना जाता है। उच्चारण में फर्क के कारण बंगाली या असमिया लोग इसे फुचका और राजस्थान समुदाय के कुछ लोग पिचका भी कहते हैं।यहां गोलगप्पों में मैश किए हुए उबले आलू में उबले हुए देसी चने, धनियापत्ती, तरह तरह के मसाले मिलाकर स्टफिंग की जाती है। कई इमली के पानी तो कहीं, नींबू पानी में पुदीना मिलाकर सर्व किया जाता है।

गुपचुप छत्तीसगढ़ में गोलगप्पों को गुपचुप कहते हैं। मध्यप्रदेश औऱ उड़ीसा के कुछ इलाकों में भी इसे गुपचुप कहकर ही पुकारते हैं। छत्तीसगढ़ में फिलिंग के रूप में मैश किए उबले हुए आलू और उबली हुई पीली मटर का इस्तेमाल किया जाता है। यहां पानी आमतौर पर इमली या अमचूर से बनाते हैं।

टिक्की – उत्तरप्रदेश में कुछ खास इलाकों में और मध्यप्रदेश के होशंगाबाद में गोलगप्पों को टिक्की कहकर पुकारते हैं। यहां भरावन के रूप में उबले आलू औऱ उबले हुए काबुली चनों में तरह तरह के मसाले मिलाकर डालते हैं। पानी आमतौर पर इमली का इस्तेमाल किया जाता है।

पानीपुरी – देश के कई हिस्सों में इसे पानीपुरी के नाम से भी माना जाता है। महाराष्ट्र में यह नाम विशेष रूप से प्रचलित है। मुंबईया फिल्मों में जब भी इसका जिक्र होता है या कोई ठेली वाला दिखाया जाता है, तो पानीपुरी ही दिखाया जाता है।

फुलकी – राजस्थान औऱ गुजरात में भले ही फुलकी चपाती या रोटी को कहते हों, लेकिन उत्तर प्रदेश के पूर्वी इलाकों में फुलकी गोलगप्पों का पर्यायवाची शब्द है। यहां के गोलगप्पों का जायका भी दूसरी जगहों से जुदा है। यहां भरावन में ताजा मीठा दही इस्तेमाल किया जाता है जो इसे अलग टेस्ट देता है।

पतासी या पताशे – राजस्थान, हरियाणा और उत्तरप्रदेश के कई हिस्सों में गोलगप्पे पतासी या पताशे केनाम से जानी जाती है। यहां सूजी के पतासे भी बनते हैं औऱ आटा मैदा के भी। इनमें उबले हुई आलू और पीली मटर की फिलिंग की की जाती है। कहीं कहीं इसे बूंदी वाली पानी के साथ सर्व किया जाता है।बड़ेशहरों में सात-आठ अलग अलग स्वाद वाले पानी तैयार किए जाते हैं जिनमें पोदीने का, जीरे का औरलहसुन के स्वाद वाला पानी ज्यादा पसंदकिया जाता है। कई जगह तो भरावन में बारीक कटा हुआ प्याजभी इस्तेमाल किया जाता है।

गोलगप्पा गोलगप्पा इसका यूनिवर्सल नाम है। देश के किसी भी कोने में जाइए और आपको इसकास्थानीय नाम मालूम नहीं है तो भी आप बेहिचक गोलगप्पे के नाम से पूछिए, सब जान जाएंगे। ऐसा पत्र-पत्रिकाओं में इसके शब्द के बहुप्रचलित प्रयोग के चलते ही संभव हुआ है। संभवतः आकार में गोल होनेऔऱ मुंह में ‘गप्प’ से खा जाने के कारण इसका यह नाम पड़ा है।

 

शिखर चंद जैन