ममता धर्मनिरपेक्षता की पहचान : पार्थ

-मुकुल भाजपा में, सवाल पर दिया जवाब

-कहा, बंगाल की जनता को दूसरा मंजूर नहीं

कोलकाता : सारदा चिटफंड घोटाले में सीबीआई द्वारा पूछताछ के बाद कालीघाट से रिश्ते कमजोर होने तथा नई पार्टी गठन करने की अफवाह के बीच मुकुल राय को लेकर अटकलों का बाजार पिछले 2 साल से भी अधिक समय से गर्म है। वे तृणमूल छोड़कर नई पार्टी बनाएंगे या भाजपा मेंं शामिल होंगे, ऐसी खबरें अक्सर अखबारों में सुर्खियां बटोरती रही हैं। लेकिन कई दिनों से प्रदेश भाजपा की ओर से मुकुल के बारे में दिए बयान ने फिर से इसे बल दिया है कि क्या मुकुल भाजपा में जा रहे हैं? विशेषकर प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष द्वारा मुकुल के बारे में रविवार को हल्दिया में चुनाव प्रचार के दौरान दिए बयान के बाद, सवाल ने और जोर पकड़ा है। लेकिन सोमवार को तृणमूल महासचिव पार्थ चटर्जी ने इस सवाल का खुलकर जवाब दिया। तथा स्पष्ट कर दिया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बंगाल ही नहीं देश में धर्म निरपेक्षता की पहचान व चेहरा हैं। बंगाल की जनता को कोई दूसरा चेहरा पसंद ही नहीं है।

कालीघाट से रिश्के बिगड़ने के बाद एक समय अलग राजनीतिक दल के गठन की ओर बढ़ने का संकेत देने वाले मुकुल की खामोशी भी सवालों को हवा दे रही थी। लेकिन रविवार को उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि तृणमूल छोड़कर कहीं नहीं जा रहे हैं। वे तृणमूल नहीं छोड़ रहे हैं। उनके बयान के कुछ देर बाद ही दिलीप घोष द्वारा फिर उनके भाजपा में शामिल होने के बारे में संकेत देने के सवाल पर सोमवार को तृणमूल महासचिव पार्थ चटर्जी ने कहा कि यह सब अखबारों में कई दिनों भी छप रहा है। लेकिन तृणमूल कांग्रेस एकजुट पार्टी है। यह सांप्रदायितता विरोधी धर्म निरपेक्ष पार्टी है जो ममता बनर्जी को सामने रखकर लड़ाई कर रही है। ममता बनर्जी एक असांप्रदायिक चेहरा हैं जिसे बंगाल की जनता पसंद करती है। ममता पर जनता विश्‍वास करती है। इस चेहरे को छोड़कर बंगाल की जनता को कोई दूसरा चेहरा पसंद ही नहीं है। जनता विश्‍वास भी नहीं करती, सहयोग भी नहीं करती है। राजनमीतिक जानकार मान रहे हैं कि इस बयान के माध्यम से पार्थ ने एक तीर से दो निशाना साधा है। एक तरफ जहां उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि बंगाल में ममता का कोई विकल्प ही नहीं है, वहीं उन्होंने मुकुल को संकेत देने की कोशिश की है कि उनके भाजपा में शामिल होने पर भी पार्टी पर कोई प्रतिकुल असर नहीं पड़ेगा। ब्रांड ममता के सामने मुकुल राय की राजनीतिक तथा सांगठनिक सोच उनके आगे कहीं भी नहीं टिक सकेगी। बंगाल की जनता ममता के अलावा किसी और को स्वीकार नहीं करेगी।

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