RBI और CBI के बाद अब CIC ने केंद्र पर साधा निशाना, उठाए सवाल

RBI और CBI के बाद अब एक और बड़ी संस्था ने मोदी सरकार पर इशारों में सवाल उठा दिए हैं. सूचना आयुक्त श्रीधर आचार्युलू ने कहा कि जानबूझकर लोन नहीं चुकाने वाले डिफॉल्टरों की सूची सौंपने के संबंध में हमें आरटीआई मिली थी. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद आरबीआई ने ये सूची सार्वजनिक नहीं की. इससे पहले भी ऐसी ही एक आरटीआई लगाई गई थी, जिसमें सूचना आयुक्त ने नाम उजागर करने का आदेश दिया था.

एक दिन पहले ही सीआईसी ने जानबूझकर बैंक कर्ज नहीं चुकाने वालों की सूची का खुलासा करने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पालन नहीं करने के लिए आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल को कारण बताओ नोटिस जारी किया था.

सीआईसी ने इसके साथ ही प्रधानमंत्री कार्यालय, वित्त मंत्रालय और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से कहा है कि वे फंसे हुए कर्ज पर आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन का पत्र सार्वजनिक करें.

उच्चतम न्यायालय के आदेश के बावजूद 50 करोड़ रुपये और उससे अधिक का लोन लेने और जानबूझकर उसे नहीं चुकाने वालों के नाम के संबंध में सूचना आरबीआई द्वारा नहीं उपलब्ध कराने को लेकर नाराज सीआईसी ने पटेल से यह बताने के लिए कहा था कि फैसले का पालन नहीं नहीं करने को लेकर उन पर क्यों न अधिकतम जुर्माना लगाया जाए.

उच्चतम न्यायालय ने तत्कालीन सूचना आयुक्त शैलेश गांधी के उस फैसले को बरकरार रखा था, जिसमें उन्होंने जानबूझकर लोन नहीं चुकाने वालों के नामों का खुलासा करने को कहा था.

सीआईसी ने याद दिलाया कि पटेल ने 20 सितम्बर को सीवीसी में कहा था कि सतर्कता पर सीवीसी की ओर से जारी दिशा-निर्देश का उद्देश्य अधिक पारदर्शिता, सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी और सत्यनिष्ठा की संस्कृति को बढ़ावा देना तथा उसके अधिकार क्षेत्र में आने वाले संगठनों में समग्र सतर्कता प्रशासन को बेहतर बनाना है.

 

सूचना आयुक्त श्रीधर आचार्युलू ने कहा कि आयोग का मानना है कि आरटीआई नीति को लेकर जो आरबीआई गवर्नर और डिप्टी गवर्नर कहते हैं और जो उनकी वेबसाइट कहती है उसमें कोई मेल नहीं है. जयंती लाल मामले में सीआईसी के आदेश की उच्चतम न्यायालय द्वारा पुष्टि किये जाने के बावजूद सतर्कता रिपोर्टों और निरीक्षण रिपोर्टों में अत्यधिक गोपनीयता रखी जा रही है.

उन्होंने कहा कि इस अवज्ञा के लिए सीपीआईओ को दंडित करने से किसी उद्देश्य की पूर्ति नहीं होगी, क्योंकि उन्होंने शीर्ष प्राधिकारियों के निर्देश के तहत कार्य किया.

आचार्युलू ने कहा कि आयोग गवर्नर को डीम्ड पीआईओ मानता है जो कि खुलासा नहीं करने और उच्चतम न्यायालय एवं सीआईसी के आदेशों को नहीं मानने के लिए जिम्मेदार हैं. आयोग उन्हें 16 नवम्बर 2018 से पहले इसका कारण बताने का निर्देश देता है कि इन कारणों के लिए उनके खिलाफ क्यों न अधिकतम जुर्माना लगाया जाए. 

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