गाजियाबाद में धुएं में उड़ा पटाखों पर लगा प्रतिबंध

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) की हवा में जहां पहले से ही जहरीला धुआं भरा हुआ है वहीं पटाखा विक्रेता इस दीवाली पर हालात और खराब करने पर आमादा हैं. सुप्रीम कोर्ट के प्रतिबंध का खुला उल्लंघन करते हुए ये पटाखा विक्रेता धड़ल्ले से खतरनाक पटाखे थोक में बेच रहे हैं.   

सितंबर के आखिर में सुप्रीम कोर्ट ने बेरियम कम्पाउंड वाली आतिशबाजी की बिक्री पर रोक लगा दी थी. ये आसमान पर जाकर फटने पर रंगों का अद्भुत नजारा पेश करते हैं लेकिन दिल्ली और एनसीआर की हवा में खतरनाक टॉक्सिन्स छोड़ जाते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने हालांकि पर्यावरण के अनुकूल ऐसे ग्रीन पटाखों की अनुमति दी थी जिनसे हवा कम प्रदूषित होती है.

सुप्रीम कोर्ट ने पटाखे फोड़ने की समय सीमा भी निर्धारित की. पूरे देश में रात 8 बजे से 10 बजे के बीच ही पटाखे छोड़े जा सकते हैं. इंडिया टुडे की पड़ताल में सामने आया कि पटाखा विक्रेता दिल्ली से महज दो घंटे की दूरी पर ही हानिकारक पटाखे जम कर बेच रहे हैं. इंडिया टुडे के अंडर कवर रिपोर्टर ने देखा कि गाजियाबाद जिले के फार्रूखनगर और मोदीनगर के गोदामों में ग्राहकों को कानफोड़ू और खतरनाक पटाखे उपलब्ध हैं.

गाजियाबाद एनसीआर में उत्तर प्रदेश से आने वाले 7 जिलों में शामिल है. दिल्ली-मेरठ हाईवे पर स्थित मोदीनगर में देखा गया कि ‘पशुपति फायरवर्क्स’ ने अपना विशाल स्टील का दरवाजा पटाखों के खरीदारों के लिए खुला रखा हुआ है. अंदर स्टोर में कर्मचारी मुंह पर अस्पताल वाला मास्क लगाकर रैक्स में लगा हुआ पटाखों का बड़ा भंडार दिखा रहे हैं.  

पटाखों के इस अवैध कारोबार को बंद कराने के लिए पुलिस या प्रशासन की ओर से कार्रवाई करने वाले दूर दूर तक नहीं दिखे. स्टोर में अनार, फुलझड़ी, चखरी, रोमन कैंडल्स, रॉकेट्स, रावण बम धड़ल्ले से बिकते दिखे. स्टोर के एक कर्मचारी ने अंडर कवर रिपोर्टर से पूछा, ‘तुम्हें बम चाहिए’?  ये 150 रुपए का पैकेट है.’ कर्मचारी ने साथ ही कानफोड़ू बम का पैकेट दिखाया. कर्मचारी ने फिर अनार और आसमान में जाकर फटने वाले रॉकेट्स भी दिखाए.    

 

स्टोर के एक और कर्मचारी ने 30 बमों की लड़ी वाले एक और कार्टन को दिखाते हुए कहा, ‘इसे एक बार जलाने पर 30 धमाके एक के बाद एक होंगे.’ स्टोर की ओर से प्रतिबंधित पटाखों की एनसीआर में कहीं भी डिलिवरी देने का वादा किया. स्टोर कर्मचारी ने कहा, ग्राहक इन्हें, दिल्ली, सहारनपुर और मुजफ्फरनगर ले जा रहे हैं. एनसीआर में फार्रूखनगर, पटाखों की बिक्री का बड़ा केंद्र है. यहां आस मोहम्मद नाम का शख्स पटाखों का गोदाम चलाते दिखा लेकिन आखों में धूल झोंकने के लिए इस गोदाम को बाहर से बंद रखा गया है.  

इंडिया टुडे के अंडर कवर रिपोर्टर ने देखा कि ताला लगे दरवाजे के पीछे गोदाम में पटाखों का जमकर कारोबार हो रहा है. गोदाम में थोक दामों पर पटाखे बेचते और खरीदते लोग कैमरे पर कैद हुए. गोदाम के कर्मचारियों ने माना कि उनके पास ऐसे कोई पटाखे नहीं हैं जिन्हें पर्यावरण के लिए सुरक्षित कहा जा सके. जब अंडरकवर रिपोर्टर ने पूछा कि ‘क्या ग्रीन पटाखे मिलेंगे?’   

गोदाम के कर्मचारी ने माना, ‘यहां कुछ ग्रीन नहीं है. ये परपंरागत पटाखे हैं. इसी वजह से हम इन्हें छुप कर बेच रहे हैं.’ फार्रूखनगर में ही चौधरी फायरवर्क्स में भी अंधकार और दुर्गंध भरे कमरे में हानिकारक पटाखे बाकायदा डिस्पले कर बिकते दिखे. यहां एक कर्मचारी ने इंडिया टुडे के अंडर कवर रिपोर्टर से कहा, ‘अंदर आओ भाई, क्या चाहते हो. जल्दी से बताओ.’ इस कर्मचारी ने भी कहा कि वहां पर्यावरण के लिए सुरक्षित जैसा कोई पटाखा मोजूद नहीं है. कमर्चारी ने प्रतिबंधित पटाखों को दिखाते हुए कहा, ‘यहां तक कि सरकार को भी नहीं पता कि ग्रीन पटाखे कैसे होते हैं.’

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