भारत के लिए आतंकियों के खिलाफ लड़ने को तैयार ये दो अमेरिकी जवान

उत्‍तराखंड में डिवीजन स्तरीय युद्धाभ्यास के दौरान भारत और अमेरिकी सैनिक फील्ड अभ्यास में खूब पसीना बहा रहे हैं. यहांरानीखेत के चौबटिया में युद्धभ्यास चल रहा है.

इस कार्यक्रम को कुछ इस तरह तैयार किया गया है कि दोनों देशों के जवान एक-दूसरे के संगठन, हथियारों, उपकरणों और सामरिक अभ्यास से परिचित हो जाएं.  दोनों देशों के जवानो को आतंकवाद के खिलाफ साझा ऑपेरशन की तैयारी कराई जा रही है. चौबटिया के पहाड़ी और जंगल के इलाके में युद्ध जैसे हालात तैयार किए गए हैं. अमेरिकी सेना में दो ऐसे जवान भी हैं जो भारत के रहने वाले हैं.

चंडीगढ़ की महिला जवान

इनमें एक महिला जवान चंडीगढ़ निवासी बलरीत खेरा हैं. खेरा अमेरिकी सेना में सार्जेंट है. उच्च शिक्षा के बीच मे ही देश की यह बेटी 2006 मे यूएस आर्मी मे भर्ती हुई तो पंजाब की दिलेरी ने उसे अमेरिकी फौज मे एक अलग पहचान दिला दी.

खास बात यह है कि ठीक एक साल बाद 2007 और 2009 में बलरीत को अमेरिकी इंफेट्री यूनिट ने विशेष ऑपरेशन के तहत उसे इराक भेजा. यहां यह जांबाज अकेली महिला कमांडो के रूप में कसौटी पर खरी उतरी.

होशियारपुर टांडा के गबरू गुरप्रीत सिंह गिल
 

इसी तरह पंजाब के होशियारपुर टांडा के गबरू गुरप्रीत सिंह गिल भी यूएस आर्मी के फुर्तीले जांबाजों में हैं. उन्‍हें कारगिल युद्ध ने सेना में जाने की प्रेरणा दी. लेकिन संयोग यह रहा कि वह भारत की बजाय अमेरिकी फौज का सिपाही बन गए. उन्‍होंने इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई जयपुर से ही की. उन्‍होंने साल 2008 में राजस्‍थान के कोटा से बी-टेक किया. इन दोनों जवानों ने ”आजतक” से ख़ास बातचीत में बताया कि उनके दिल में आज भी भारत के लिए प्यार और हिम्मत का जज्बा है.

भारतीय सैनिकों के पास कश्मीर के  हालात से निपटने का अनुभव है जबकि अमेरिकी सैनिकों के पास इराक और अफगानिस्तान का. दोनों सेनाएं मिलकर उग्रवादियों की घुसपैठ और आतंकवाद से मुकाबले के लिए एक साथ लड़ने का अभ्यास कर रही हैं. साल 2004 में 40-45 जवानों से शुरू साझा युद्धभ्यास अब डिविजन स्तर पर बड़ा आकार ले चुका है.

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