मॉनसून सत्र में मोदी सरकार के खिलाफ टीडीपी फिर लाएगी अविश्वास प्रस्ताव

तेलगु देशम पार्टी ने मॉनसून सत्र में नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ संसद में अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए कोशिशें तेज़ कर दी है. मॉनसून सत्र 18 जुलाई से शुरू हो रहा है. पार्टी के अध्यक्ष एन चंद्रबाबू नायडू ने अविश्वास प्रस्ताव पर समर्थन के लिए अलग-अलग दलों को चिट्ठी लिखी है. चंद्रबाबू नायडू आंध्रप्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं. इस मुद्दे पर बीजेपी से समर्थन न मिलने के चलते उनकी पार्टी पहले ही केंद्र सरकार और एनडीए से बाहर हो गई है.

एनडीए छोड़ने के बाद टीडीपी फिलहाल संयुक्त विपक्ष का औपचारिक हिस्सा नहीं है. ऐसे में सोमवार को दिल्ली में विपक्षी दलों ने फैसला किया कि अगर टीडीपी अविश्वास प्रस्ताव को आगे नहीं बढ़ाती है तो कांग्रेस और दूसरी पार्टियों को इस संबंध में अपने-अपने प्रस्ताव आगे बढ़ाना चाहिए.

सूत्रों ने कहा कि लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने विपक्षी दलों की बैठक के दौरान इस मुद्दे को उठाया. उन्होंने देश के सामने आने वाले अलग-अलग मुद्दों पर सरकार को घेरने में विपक्षी समर्थन की मांग की है.

मल्लिकार्जुन खड़गे ने बैठक में सभी दलों से कहा है कि अगर तेलगु देशम पार्टी मोदी सरकार के खिलाफ संसद में अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाती है तो फिर ये काम उन्हें करना होगा.

आपको बता दें कि संसद के बजट सत्र में भी तेलगु देशम पार्टी ने केंद्र सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का प्रयास किया था. नायडू मार्च में एनडीए से अलग हो गये थे. बजट सत्र में विशेष राज्य के दर्ज की मांग को लेकर हंगामा भी हुआ था.

विपक्षी दलों को चिट्ठी में चंद्रबाबू नायडू ने लिखा है कि एनडीए सरकार का अड़ियल रुख लगातार बना हुआ है. ऐसे में टीडीपी ने सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का फैसला किया है.

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री ने लिखा है, ” अविश्वास प्रस्ताव पर मैं आपके समर्थन के लिए आभारी रहूंगा.”

टीडीपी सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल विपक्षी दल के नेताओं से मुलाकात कर रहा है जिससे कि वो मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के लिए समर्थन जुटा सके. इसको लेकर सोमवार को टीडीपी के सांसदों ने तेलंगाना राष्ट्र समिति के नेताओं और डीएमके के कनिमोझी से मुलाकात भी की.

चंद्रबाबू नायडू शुरू से ही आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग करते रहे हैं. लेकिन सरकार साफ कर चुकी है कि इस मांग को पूरा करना मुश्किल है क्योंकि इसके बाद बाकी राज्य भी इसी तरह का दबाव बनाना शुरू कर देंगे. नायडू विशेष राज्य का दर्जा इसलिए चाहते हैं क्योंकि इसके बाद आंध्र प्रदेश में योजनाओं का 90 फीसदी खर्च केंद्र सरकार को वहन करना पड़ेगा.

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