पंचायत चुनाव :  रोक एक दिन और बढ़ा

-हाईकोर्ट में बुधवार को फिर सुनवाई

-अनिश्‍चित हो रहा तय समय पर चुनाव

कोलकाता, समाज्ञा

 कलकत्ता हाईकोर्ट की एकल पीठ ने पंचायत चुनाव प्रक्रिया पर पहले से जारी रोक मंगलवार को और एक दिन के लिए बढ़ा दी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मामले की सुनवाई कर रहे एकल पीठ के न्यायाधीश सुब्रत तालुकदार ने मंगलवार को खत्म हो रही रोक की सीमा को बुधवार तक के लिए बढ़ा दिया। मामले की सुनवाई फिर बुधवार सुबह 10.30 बजे होगी। मंगलवार को न्यायालय द्वारा अपील स्वीकार करने  व चुनाव प्रक्रिया पर ऐतराज जताते हुए तृणमूल कांग्रेस के अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने कहा कि चुनाव आगोय ने राज्य चुनाव कानून 2003 के 46(2) धारा में कानूनी गलती होने के चलते ही आदेश वापस लिया था। इसमें आयोग की कोई गलती नहीं थी बल्की उसने हो रही चूक से स्वयं को समय रहते बचाया। साथ ही उन्होंने एक बार शुरू चुनाव प्रक्रिया पर हाईकोर्ट के हस्तक्षेप पर भी सवाल उठाया तथा कहा कि न्यायालय जारी चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं कर सकता। उन्होंने एक मामले को न्यायालय में उदाहरण के तौर पर पेश भी किया। जवाब में न्यायाधीश सुब्रत तालुकदार ने कल्याण बनर्जी से सवाल किया कि वे उनके तर्क से सहमत हैं। लेकिन न्याालय सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मामले की सुनवाई कर रहा है। ऐसे में उन्हें(कल्याण) न्यायालय को बताना होगा कि वह मामले की सुनवाई क्यों नहीं कर सकता? इस बीच मंगलवार को हाईकोर्ट द्वारा चुनाव प्रक्रिया पर फिर एक दिन के लिए रोक लगाने से पंचायत चुनाव के तय समय पर होने को लेकर असमंजस की स्थिति और भी बढ़ गई। राजनीतिक दल व राज्य चुनाव आयोग सूत्रों का दावा है कि अगर जल्द ही हाईकोर्ट ने फैसला नहीं लिया तो प्रथम चरण(एक मई) के साथ ही पंचायत चुनाव के अन्य 2 चरणों पर भी अनिश्‍चितता के बादल छा जाएंगे।

इससे पहले सुनवाई के दौरान कल्याण बनर्जी ने सवाल उठाया कि हाईकोर्ट मामले को स्वीकार्य ही नहीं कर सकता। वह चुनाव प्रक्रिया शुरू होने पर उसमें हस्तक्षेप भी नहीं कर सकता क्योंकि नामांकन भरे जा चुके हैं। अब तक नामांकन वापसी का कार्य भी शुरू हो जाना चाहिए। इस पर न्यायाधीश सुब्रत तालुकदार ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मामले की सुनवाई हो रही है। ऐसे में सभी पक्षों की दलील सुनना अत्यावश्यक है।

सुुप्रीम कोर्ट जा सकता है मामला : मंगलवार को मामले की सुनवाई के दौरान कल्याण बनर्जी की टिप्पणी से स्पष्ट संकेत मिले कि पंचायत चुनाव मामले का निपटारा हाईकोर्ट में नहीं सुप्रीम कोर्ट में ही होगा। उन्होंने न्यायालय को बताया कि चुनाव आयोग ने राज्य चुनाव कानून 2003 के 46(2) धारा के तहत हुई कानूनी गलती के चलते ही नामांकन समय बढ़ाने का आदेश वापस लिया। लेकिन सुनवाई के दौरान ही न्यायाधीश तालुकदार ने काफी हल्के अंदाज में कहा कि लगता है यह मामला यहीं खत्म नहीं होगा। जवाब में कल्याण ने कहा कि यह हम भी समझ रहे हैं। हाईकोर्ट में यह मामला खत्म नहीं होगा। कल्याण की इस टिप्पणी को राजनीतिक दल काफी अहम मान रहे हैं। उनका कहना है कि कल्याण ने अपने आगे की रणनीति का संकेत दे दिया है कि पंचायत चुनाव मामले का फैसला हाईकोर्ट में नहीं बल्की सुप्रीम कोर्ट में ही तय होगा। कल्याण ने भाजपा के आरोप पर भी न्यायालय में टिप्पणी की और कहा कि भाजपा ने 38,185 नामांकन पत्र दाखिल किए हैं। ऐसे में नामांकन नहीं करने देने का उनका आरोप तथ्य से परे है।

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