साहित्यकार का हृदय सच व संवेदना से भरा होता है ः अनुराधा लोहिया

उप कुलपति ने राजेंद्र प्रसाद सभागार का किया उद्घाटन

कोलकाता, समाज्ञा

 प्रेसिडेंसी विश्‍वविद्यालय की उप कुलपति प्रोफेसर अनुराधा लोहिया ने कहा कि मनुष्य का कला और साहित्य से गहरा नाता होता है। कला मनुष्य को मनुष्य बनाती है। आदमी के बात-विचार व व्यवहार को देखकर आप आसानी से अंदाजा लगा सकते हैं कि अमुक व्यक्ति साहित्य अथवा कला प्रेमी है या नहीं। प्रोफेसर लोहिया मंगलवार को प्रेमचंद व्याख्यानमाला के अंतर्गत ‘साहित्य से मेरा नाता’ विषय पर व्याख्यान दे रही थीं। उन्होंने कहा कि उन्हें साहित्यिक संस्कार अपने माता-पिता से मिले हैं और मैं हिंदी साहित्य से गहराई से जुड़ी रही हूँ। व्याख्यान से पूर्व उन्होंने अत्याधुनिक उपकरणों से युक्त सभागार का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उनके द्वारा इस सभागार का नाम देशरत्न भारत के पहले राष्ट्रपति के नाम पर रखने की औपचारिक घोषणा की गई। हिन्दी विभाग की विभागाध्यक्ष व कला संकाय की अधिष्ठाता प्रोफेसर तनुजा मजुमदार ने स्वागत भाषण दिया। धन्यवाद ज्ञापन करते हुए प्रोफेसर वेदरमण ने कहा कि यह एक यादगार क्षण है, जिसमें प्रेसिडेंसी के पूर्व छात्र का सम्मान एक प्रेसिडेंसियन प्रोफेसर अनुराधा लोहिया द्वारा किया जा रहा है। कार्यक्रम में अन्य विभागों के अध्यापकों के अलावा डॉ. मैरी हंसदा, डा. मुन्नी गुप्ता समेत विभाग के शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थे। 

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