घायल बेटे के लिए बीच सड़क मदद मांगती रही मां, JNU के छात्रों का दिल नहीं पसीजा

देश की राजधानी दिल्ली में किसी न किसी मुद्दे पर धरना-प्रदर्शन होना आम बात है. लेकिन, अगर विरोध या धरना प्रदर्शन के बीच ट्रैफिक इतना जाम हो जाए और उसमें एंबुलेंस फंस जाए या किसी घायल को अस्पताल ले जाने के लिए रास्ता ही न मिले; तो ये आम बात खास हो जाती है. ताजा मामला जवाहर लाल नेहरू यूनिवसर्टी (जेएनयू) के विरोध प्रदर्शन का है.

सोमवार को जेएनयू के छात्र यौन उत्पीड़न के आरोपी प्रोफेसर के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे. इससे सड़क पर गाड़ियों की कतारें लग गईं. ट्रैफिक जाम में एक महिला खून से लथपथ अपने बच्चे के साथ फंसी हुई थी, वो छात्रों को थोड़ा रास्ता देने की मांग कर रही थी, ताकि अपने बच्चे को तुरंत अस्पताल पहुंचा सके. लेकिन, प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने उसकी एक न सुनीं. मौके पर मौजूद निकिता सारा नाम की युवती ने ये पूरा वाकया अपने फेसबुक पेज पर शेयर किया है.

निकिता सारा ने फेसबुक पर लिखा, “मैंने इसके पहले अपनी जिंदगी में इतना गुस्सा कभी नहीं देखा. जेएनयू के प्रदर्शन के बीच सड़क पर जाम लग गया था. ट्रैफिक जाम में मैंने खून से लथपथ एक बच्चे को देखा, जो अपनी मां के गोद में था. शायद वो बेहोश हो गया हो. उसकी मां मदद के लिए चिल्ला रही थी. कई बार उसने कुछ लोगों से रास्ता देने के लिए कहा, ताकि उसकी कार आगे निकल सके. लेकिन, जाम में फंसे लोग भी बेबस थे. मैंने अपनी कार सड़क के बीच में पार्क की और यह पूछने लगी कि आखिर प्रदर्शन किस चीज को लेकर हो रहा है. मैंने देखा कि जेएनयू के कुछ छात्र ड्रम बजाकर नाच रहे थे और ‘आजादी-आजादी’ चिल्ला रहे थे. मैं उनके पास गई और उस मां और बच्चे के बारे में बताया.”

निकिता ने आगे लिखा, ” मैंने उन्हें बताया कि इस रोड से तीन बड़े अस्पताल पड़ते हैं. बच्चे को तुरंत अस्पताल ले जाना है, रास्ता दिया जाए. लेकिन, छात्रों का कहना था इन चीजों से उन्हें कोई मतलब नहीं है. वे यौन उत्पीड़न के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं. दूसरी ओर मैंने एक लड़की को देखा, जो किसी टीवी चैनल को इंटरव्यू दे रही थी. मैंने उसका इंटरव्यू रोकने की कोशिश की. उसे बच्चे के बारे में बताया, जिसे तुरंत अस्पताल ले जाना था. उस लड़की का नाम शैला राशिद है. उसने 10 बार मुझसे यही पूछा कि क्या मैं कभी कॉलेज गई हूं?”

“मैंने कहा हां मैं भी एक अच्छे कॉलेज से हूं. मुझे पता है कि लड़ाई कैसे लड़ी जाती है. लड़ाई नैतिकता और मूल्यों के साथ लड़ी जाती है.” बताया जा रहा है कि जेएनयू का प्रदर्शन खत्म होने के बाद बच्चे को अस्पताल पहुंचाया जा सका.

बता दें कि दिल्ली पुलिस ने प्रोफेसर अतुल जौहरी के खिलाफ लैंगिक उत्पीड़न के मामले की जांच के लिए, प्रदर्शनकारी छात्रों के सात दलों को बुलाया है. इस मामले में करीब 250 छात्रों ने वसंत कुंज थाने के पास जेएनयू के प्रोफेसर अतुल जौहरी के खिलाफ, एफआईआर दर्ज कराने के लिए वसंत कुंज थाने के बाहर इकट्ठे हुए थे और उनकी पुलिस बलों से झड़प हो गई. जेएनयूएसयू की प्रेसीडेंट गीता कुमारी ने कहा है कि प्रोफेसर जौहरी पर लगे आरोपों की जांच पुलिस कानून के मुताबिक करेगी.

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