अभी भी नॉनस्टॉप जारी है बिहार में नक़ल

कदाचार के लिए बदनाम बिहार की एक और तस्वीर छपरा से सामने आई है. हमेशा अपने अजीबो-गरीब कारनामों से सुर्खियों में रहने वाले बिहार के जयप्रकाश विश्वविद्यालय में परीक्षार्थी थर्ड ईयर के जीएस की परीक्षा में ऐसे पेपर लिखते नजर आए, मानों बारात में भोज खाने आए हों. मामला छपरा के जयप्रकाश विश्वविद्यालय के अंतर्गत चलने वाले राजेन्द्र कॉलेज का है.

राजेन्द्र कॉलेज में जीएस की परीक्षा के दौरान परीक्षार्थियों को बरामदा, जमीन एवं सीढ़ी के नीचे, जहां भी जगह मिली वहां बैठाकर प्रश्न पत्र और आंसर शीट दे दी गई. आलम ऐसा था कि कोई आमने-सामने फर्श पर बैठकर परीक्षा दे रहा था तो कोई खड़े-खड़े कॉपी लिख रहा था.

यहां कोई परीक्षार्थी कमीज उतारकर प्रयोगशाला के टेबल पर पालथी मारकर परीक्षा दे रहा था, तो कोई ऐसे बैठा था जैसे भोज की पांत में बैठा हो. पंखे की व्यवस्था न होने के कारण ज्यादातर परीक्षार्थी अपनी कमीज उतार कर गर्मी की तपिश से बचने की कोशिश करते दिखे.

कार्रवाई के नाम पर प्रिंसिपल को डांटा

दिलचस्प तो यह था कि जहां छात्रों को एक-दूसरे की आंसर शीट में देखने का भी मौका नहीं मिलना चाहिए, वहां सभी छात्र एक दूसरे की मदद से परीक्षा दे रहे थे. उन्हें देखने या रोकनेवाला कोई नहीं था. कहने के लिए वहां शिक्षकों की तैनाती तो थी लेकिन हालात देखकर उन्होंने भी अपने आंख कान बंद कर लिए थे. इस मामले में कार्रवाई के नाम पर जयप्रकाश विश्वविद्यालय के वीसी ने राजेन्द्र कॉलेज के प्रिंसिपल को जमकर डांट लगाई, वहीं उन्होंने इस मामले की जानकारी नहीं होने की बात कही.

 

 

गौरतलब है कि परीक्षा से पहले खुद कुलपति प्रो. हरिकेश सिंह ने यहां का दौरा किया था. परीक्षा शुरू होने के पहले सभी प्राचार्य की बैठक कर सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में परीक्षा लेने का निर्देश दिया था. इतना ही नहीं, कुलपति ने खुद 10 मई को वाईएन कॉलेज दिघवारा केंद्र पर कु-व्यवस्था व सामूहिक नकल होने की शिकायत पर कड़ा एक्शन लिया था. उन्होंने वहां की द्वितीय पाली की परीक्षा को रद्द करते हुए केंद्राधीक्षक तक को बदल दिया था, लेकिन उसके बाद भी शहर के अधिकांश परीक्षा केन्द्रों पर ऐसा ही नजारा दिखा, जिसे परीक्षा तो बिलकुल नहीं कहा जा सकता.

हालांकि, राजेन्द्र कॉलेज के प्रिंसिपल प्रोफेसर वीरेंद्र प्रसाद यादव का कुछ अलग ही तर्क हैं. उनका कहना है कि ये बदनाम करने के लिए किया गया है. जितने परीक्षार्थी हैं, उनके बैठने की व्यवस्था यहां नहीं है. उन्होंने लिखा था कि परीक्षार्थियों की संख्या ज्यादा है इसलिए आसपास के स्कूलों में परीक्षा की व्यवस्था की जानी चाहिए.

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