एक महीने में पेट्रोल हुआ 2.54 रुपये महंगा, कीमत 80 रुपये के करीब

पेट्रोलडीजल की कीमतों में जारी तेजी से आम आदमी की जेब पर बोझ बढ़ता जा रहा है. पिछले एक महीने में पेट्रोल के दाम 2.5 रुपए से ज्यादा बढ़ गए है. हालांकि, एक्सपर्ट्स मान रहे हैं कि फिलहाल राहत मिलने की उम्मीद नजर नहीं आ रही है.

इस दौरान देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत पिछले एक महीने में 69.35 रुपये से बढ़कर 71.89 रुपये प्रति लीटर हो गई है. वहीं, इस दौरान चेन्नई में कीमतें सबसे ज्यादा बढ़ी हैं. यहां एक महीने में कीमत 2.68 रुपये बढ़कर 74.55 रुपये प्रति लीटर हो गई है.

आपको बता दें कि इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल महंगा होने और  भारतीय रुपये में आई कमजोरी के चलते पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ रहे हैं.

पेट्रोल हुआ 2.5 रुपये से ज्यादा महंगा

1.दिल्ली
20 दिसंबर: 69.35 रुपये प्रति लीटर
20 जनवरी: 71.89 रुपये प्रति लीटर
2.54 रुपये महंगा हुआ

2.कोलकाता
20 दिसंबर: 72.11 रुपये प्रति लीटर
20 जनवरी: 74.60 रुपये प्रति लीटर
2.49 रुपये महंगा हुआ

3.मुंबई
20 दिसंबर: 77.25 रुपये प्रति लीटर
20 जनवरी: 79.77 रुपये प्रति लीटर
2.52 रुपये महंगा हुआ

4.चेन्नई
20 दिसंबर: 71.87 रुपये प्रति लीटर
20 जनवरी: 74.55 रुपये प्रति लीटर
2.68 रुपये महंगा हुआ
नोट ये सभी आंकड़े सरकारी पेट्रोलियम कंपनी आईओसी की वेबसाइट से लिए गए हैं.

85 रुपए हो सकता है पेट्रोल का भाव
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का भाव पहले ही 3 साल के ऊपरी स्तर पर है, इस बीच कई एजेंसियों ने साल 2018 के लिए कच्चे तेल के औसत भाव के अनुमान में इजाफा किया है. मॉर्गन स्टैनले और बैंक ऑफ अमेरिका मैरिल लिंच ने 2018 के लिए कच्चे तेल के औसत भाव के अनुमान में बढ़ोतरी की है, बैंक ऑफ अमेरिका मैरिल लिंच ने अपने अनुमान में 8 डॉलर की बढ़ोतरी की है, अब 2018 में ब्रेंट क्रूड का औसत भाव 64 डॉलर और WTI क्रूड का औसत भाव 60 डॉलर रहने का अनुमान लगाया है. इसीलिए एक्सपर्ट्स मान रहे हैं ऐसे में पेट्रोल का भाव 85 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच सकता है.

रुपए में कमजोरी से बढ़ीं चिंताएं
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में जो बढ़ोतरी हो रही थी उसकी मार भारतीय तेल कंपनियों पर कम पड़ रही थी क्योंकि घरेलू स्तर पर भारतीय करेंसी रुपया मजबूत था, रुपए की मजबूती की वजह से तेल कंपनियों को विदेशों से तेल आयात की लागत कुछ कम पड़ रही थी. लेकिन अब तेल कंपनियों को यह राहत नहीं रही है, डॉलर के मुकाबले रुपए में अचानक तेज  गिरावट आ गई है जिस वजह से तेल कंपनियों की लागत बढ़ने लगी है और उनको इस लागत का बोझ ग्राहकों पर डालने के लिए पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी करने पर मजबूर होना पड़ेगा. अगर रुपए में कमजोरी और बढ़ती है तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी होना लगभग तय हो जाएगा.

पेट्रोल-डीजल के रेट्स इन आधार पर होते हैं तय
एनर्जी एक्सपर्ट्स नरेंद्र तनेजा ने न्यूज18 हिंदी को बताया कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियां तीन आधार पर पेट्रोल और डीजल के रेट्स तय करती हैं. पहला इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड (कच्चे तेल का भाव). दूसरा देश में इंपोर्ट (आयात) करते वक्त भारतीय रुपए की डॉलर के मुकाबले कीमत. इसके अलावा तीसरा आधार इंटरनेशनल मार्केट में पेट्रोल-डीजल के क्या भाव हैं.

मोदी के कार्यकाल में डीजल पर उत्पाद शुल्क 380% बढ़ा
>
 मोदी सरकार के कार्यकाल में डीजल पर उत्पाद शुल्क 380 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ाया गया है.
> इस दौरान यह 3.56 रुपए से बढ़कर 17.33 रुपए प्रति लीटर हो गया है.
> पेट्रोल के उत्पाद शुल्क में 120 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.
> मौजूदा सरकार के सत्ता में आने के समय इस पर उत्पाद शुल्क 9.48 पैसे था जो फिलहाल 21.48 रुपए प्रति लीटर पर पहुंच चुका है.
> अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस समय ब्रेंट क्रूड की कीमत 67 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर है.
> अचानक कीमतों में तेज गिरावट से पहले वर्ष 2014 में यह 115 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुका था.

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