देश के 14वें राष्ट्रपति बने रामनाथ कोविंद, गांव में लोग ढोल-मंजीरे बजाकर मना रहे हैं खुशी

रामनाथ कोविंद ने देश के 14वें राष्ट्रपति के रूप में शपथग्रहण किया. उनके शपथ ग्रहण में पीएम मोदी, पूर्व पीएम मनमोहन सिंह, पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और बिहार के सीएम नीतीश कुमार समेत राजनीति जगत के कई दिग्गज शामिल हुए. शपथ ग्रहण के लिए राष्ट्रपति भवन में खास तैयारियां की गई थीं. सबसे पहले रामनाथ कोविंद महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने राजघाट पहुंचे. उसके बाद रामनाथ कोविंद राष्ट्रपति भवन पहुंचे, जहां पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने उन्हें फूलों का गुलदस्ता देकर स्वागत किया.शपथ ग्रहण के बाद रामनाथ कोविंद ने कहा कि सेंट्रल हॉल में पुरानी यादें ताजा हो गईं. सेंट्रल हॉल में मैंने विचार-विमर्श किया. कई बार विचारों से सहमत होते तो कभी असहमत. विचारों का सम्मान करना इसी सेंट्रल हॉल में सीखा है. 21वीं सदी भारत की सदी होगी. मैं पूरी विनम्रता के साथ ये पद ग्रहण कर रहा हूं. मैं बहुत छोटे से गांव में मिट्टी के घर में पला बढ़ा हूं. काफी लंबी यात्रा रही. 

@1.38 रामनाथ कोविंद ने कहा- देश की सफलता का मंत्र उसकी विविधता है और यही विविधता हमारा वह आधार है जो हमें अद्वितीय बनाता है. कोविंद ने कहा, इस देश में हमें राज्यों और क्षेत्रों, पंथों, भाषाओं, संस्कृतियों, जीवन शैलियों जैसी कई बातों का सम्मिश्रण देखने को मिलता है. हम बहुत अलग हैं, लेकिन फिर भी एक हैं, एकजुट हैं. उन्होंने कहा कि देश की सफलता का मंत्र उसकी विविधता है. विविधता ही हमारा वह आधार है जो हमें अद्वितीय बनाता है. नए राष्ट्रपति ने कहा कि 21वीं सदी का भारत, ऐसा भारत होगा जो हमारे पुरातन मूल्यों के अनुरूप होने के साथ ही साथ चौथी औद्योगिक क्रांति को भी विस्तार देगा. इसमें ना कोई विरोधाभास है और ना ही किसी तरह के विकल्प का प्रश्न उठता है. उन्होंने कहा कि हमें अपनी परंपरा और प्रौद्योगिकी, प्राचीन भारत के ज्ञान और समकालीन भारत के विज्ञान को साथ लेकर चलना है.
@12.34 : राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के गांव परौंख में लोग ढोल-मंजीरे बजाकर जश्न मना रहे हैं.

@12.29 : राष्ट्र निर्माण का काम अकेले सरकारें नहीं कर सकतीं.

@12.28 : रामनाथ कोविंद ने कहा- विचारों का सम्मान करना इसी सेंट्रल हॉल में सीखा, यही लोकतंत्र की खूबसूरती

@ 12.23 : पूरी विनम्रता के साथ इस पद को ग्रहण कर रहा हूं

@12.15 : रामनाथ कोविंद ने ली राष्ट्रपति पद की शपथ, मुख्य न्यायाधीश ने दिलाई शपथ

@12.12 : संसद भवन के सेंट्रल हॉल में रामनाथ कोविंद ले रहे हैं देश के 14वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ

@12.06 रामनाथ कोविंद संसद भवन पहुंच चुके हैं. उनके साथ प्रणब मुखर्जी भी मौजूद हैं. थोड़ी देर में शपथ ग्रहण समारोह

@11.52 : प्रणब मुखर्जी के साथ रामनाथ कोविंद संसद भवन के लिए निकले

@11.29: राष्ट्रपति भवन में प्रणब मुखर्जी ने गुलदस्ता देकर रामनाथ कोविंद का किया स्वागत किया  

 @10.58 रामनाथ कोविंद की भतीजी ने कहा कि हमें लाइफ में यह लम्हा हमेशा याद रहेगा. वहीं भतीजे पंकज कोविंद ने कहा कि 17 लोग सिर्फ कानपुर देहात से आए हैं. बहुत खुशी हो रही है कि मेरे चाचा सर्वोच्च पद पर पहुंचे हैं. 

@10.50: राष्ट्रपति के शपथग्रहण के लिए राष्ट्रपति भवन में खास तैयारियां की गई हैं.

@10.40: रामनाथ कोविंद ने राजघाट जाकर महात्मा गांधी को दी श्रद्धांजलि. उनके साथ पत्नी भी थीं मौजूद

@8.00: शपथ ग्रहण का कार्यक्रम इस तरह होगा 

  • सुबह 11:49 बजे: राष्ट्रपति भवन से आने-जाने वाले राष्ट्रपति सेंट्रल हॉल के 
  • लिए निकलेंगे
  • दोपहर 12:03 बजे: दोनों संसद भवन पहुंचेंगे
  • दोपहर 12:15 से 12:20 बजे तक: नए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का शपथ ग्रहण
  • दोपहर 12:23 बजे: सांसदों के नाम नए राष्ट्रपति का संबोधन
  • दोपहर 12:33 बजे: नए राष्ट्रपति के भाषण का अंग्रेज़ी अनुवाद
  • दोपहर 12:43 बजे: समारोह समाप्त, दोनों साथ वापस लौटेंगे
  • दोपहर 12:57 बजे: दोनों राष्ट्रपति भवन पहुंचेंगे


इससे पहले राष्ट्र के नाम आख़िरी संबोधन में निर्वतमान राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी  ने कहा कि समाज में बहस होना ज़रूरी है, लेकिन इसमें हिंसा की कोई जगह नहीं है. उनके विदाई संबोधन में एक तरफ जहां भीड़ द्वारा की जा रही हिंसा का दर्द साफ दिखाई दिया, वहीं प्रदूषण और जयवायु परिवर्तन को लेकर भी वे चिंतित दिखाई दिए. भीड़ की हिंसा पर प्रणब मुखर्जी ने कहा कि हमें अपने जन संवाद को शारीरिक और मौखिक, सभी तरह की हिंसा से मुक्त करना होगा. पर्यावरण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पर्यावरण की सुरक्षा हमारे अस्तित्व के लिए बहुत जरूरी है. प्रदूषण और जयवायु परिवर्तन जैसी समस्याओं से निपटने के लिए उन्होंने सभी को साथ मिलकर काम करने का आह्वान करते हुए कहा कि हम सबको मिलकर कार्य करना होगा क्योंकि भविष्य में हमें दूसरा मौका नहीं मिलेगा.

 

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