सार्वजनिक जीवन में विश्वसनीयता बनाने की कोशिश करें नेता : जेटली

केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने बुधवार को कहा कि सभी दलों के नेताओं को सार्वजनिक जीवन में विश्वसनीयता बहाल करने की पुरजोर कोशिश करनी चाहिए, जिसमें समय के साथ गिरावट आई है। राज्यसभा में ‘भारत छोड़ा आंदोलन’ की 75वीं वर्षगांठ पर आयोजित विशेष सत्र के दौरान जेटली ने कहा कि 1942 में जब स्वतंत्रता सेनानियों ने भारत छोड़ो आंदोलन शुरू किया तो उनकी विश्वसनीयता के कारण ही पूरा देश उनके आंदोलन में शामिल हो गया।

उन्होंने निराशा भरे स्वर में कहा कि लोकसेवकों और संस्थानों की वह विश्वसनीयता अब देखने को नहीं मिलती, जिसे फिर से बहाल करने की जरूरत है।

जेटली ने कहा, “आज के दौर के सबसे बड़े सवालों में लोकसेवकों की विश्वसनीयता है। आज के दिन सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को यह संकल्प लेना चाहिए कि सार्वजनिक जीवन में और कर विभाग, पुलिस, नगर निगम जैसे सार्वजनिक संस्थानों में जनता की विश्वसनीयता को बहाल किया जाना चाहिए और भय का माहौल खत्म होना चाहिए।”

जेटली ने कहा कि आतंकवाद देश की अखंडता के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती है और विभिन्न राजनीतिक खेमों में बंट चुके देश को आतंकवाद के खिलाफ एकसुर में आवाज उठानी चाहिए और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई के लिए एक हो जाना चाहिए।

अप्रत्यक्ष तौर पर आपातकाल का संदर्भ देते हुए जेटली ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र के समक्ष अनेक चुनौतियां आईं, खासकर 70 के दशक में, लेकिन हमारा लोकतंत्र हर चुनौतियों से लड़ता हुआ मजबूत होता गया है।

उन्होंने यह भी कहा कि न्यायपालिका और विधायिका लोकतंत्र के दो खंभे हैं और उन्हें आपस में उलझने से बचना चाहिए।

जेटली ने कहा, “न्यायपालिका और विधायिका के बीच की लक्ष्मण रेखा की पवित्रता को कायम रखना होगा, जो कई बार धूमिल होती नजर आती है।”

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