सुषमा बोलीं- UN में नहीं हुआ सुधार तभी जारी हो रहे हैं आतंकियों के डाक टिकट

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने शनिवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) को संबोधित करते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र को भी सुधारों की जरूरत है. उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र दुनिया के देशों का सबसे बड़ा मंच है लेकिन धीरे-धीरे इसकी गरिमा, प्रभाव और महत्व कम होता जा रहा है.

उन्होंने कहा कि सुरक्षा परिषद में सुधारों की आवश्यकता है, और यह सुधार दिखावे के लिए नहीं बल्कि ऐसे सुधार हों जो दिल और दिमाग में बदलाव लाएं. उन्होंने कहा कि सुरक्षा परिषद आज दूसरे विश्व युद्ध के पांच विजेताओं तक ही सीमित हैं, क्या इसे आज के युग के लिए अनुकूल माना जा सकता है. जब भारत समेत विश्व का अधिकांश हिस्सा उपनिवेशवाद की गिरफ्त में था उस समय की बनाई गई सुरक्षा परिषद क्या आज के युग की चुनौतियों को समझ पा रही है.

संयुक्त राष्ट्र को एक परिवार के सिद्धांत पर चलाने की जरूरत

सुषमा स्वराज ने कहा कि आज के युग का मुकाबला करना तो दूर उसकी चुनौतियों को समझ ही नहीं पा रही है. उन्होंने अपील करते हुए कहा कि सुरक्षा परिषद में जल्द ही सुधार की प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को एक परिवार के सिद्धांत पर चलाए जाने की जरूरत है.

सुषमा स्वराज ने कहा कि इसे मैं, मेरा कहकर नहीं चलाया जा सकता. परिवार प्यार  से चलता है व्यापार से नहीं, परिवार मोह से चलता है लोभ से नहीं, परिवार संवेदना से चलता है ईर्ष्या स नहीं, परिवार सुलह से चलत है कलह से नहीं. इसलिए संयुक्त राष्ट्र को परिवार के सिद्धांत से चलाना होगा. संयुक्त राष्ट्र मैं, मेरा कहकर नहीं चलाया जा सकता, ये मंच हम, हमारा और सबको कहकर बना था. उसी सिद्धांत पर चलाया जाएगा तो जीवित बच सकेगा. हमें सबके सहयोग से सबके विकास का फैसले लेने होंगे.

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