नवाज शरीफ की ‘शहादत’ PML-N को पाकिस्तान के आम चुनाव में दिलाएगी फायदा

पाकिस्तान में भ्रष्टाचार के मामले में सजा का ऐलान होने के बाद लंदन से आकर लाहौर में बेटी मरियम के साथ गिरफ्तारी देने का दांव पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की पार्टी को आम चुनाव में फायदा दिला सकता है. कोर्ट की ओर से सजा दिए जाने के दिन से ही नवाज लगातार ‘सहानुभूति कार्ड’ खेल रहे हैं.

नवाज शरीफ को भ्रष्टाचार के मामले में उस समय सजा सुनाई गई जब पाकिस्तान में चुनावी माहौल है और 25 जुलाई को देश में आम चुनाव होने को है. चुनाव से 3 हफ्ते पहले तक नवाज शरीफ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-एन की स्थिति अच्छी नहीं बताई जा रही थी.

जश्न मना रहे कार्यकर्ता

आम चुनाव में क्रिकेटर से राजनेता बने इमरान खान की पार्टी पीटीआई बाकी पार्टियों से बेहतर करती दिख रही थी, लेकिन नवाज की गिरफ्तारी के बाद पीएमएल-एन फिर से अपने रंग में लौट आई है.

दिलचस्प है कि लाहौर में जहां नवाज की गिरफ्तारी के बाद पार्टी के कार्यकर्ता उनके जेल जाने पर मातम मनाने के बजाए उनके स्वदेश लौटने पर जश्न मना रहे हैं. उनके देश लौट आने से कार्यकर्ताओं में जोश का नया संचार पैदा हो गया है और यही उत्साह अब चुनाव तक बना रह सकता है.

नवाज की ‘शहादत’ पर वोट

पीएमएल-एन के लिए यह ऐसा नायाब मौका हाथ लगा है जिसके जरिए वह अपने कार्यकर्ताओं को मतदान से करीब 2 हफ्ते पहले फिर से सक्रिय कर मतदाताओं के पास जाकर नवाज की ‘शहादत’ पर वोट देने को कह सकती है. ऐसा हुआ तो एक के बाद एक संकटों से जूझ रहे शरीफ परिवार के लिए फिर से अच्छे दिन की शुरुआत हो सकती है.

‘सहानुभूति कार्ड’ खेल रहे नवाज

पिछले हफ्ते पाक की एक अदालत की ओर से सजा का ऐलान किए जाने के तुरंत बाद नवाज ने लंदन में अपनी बेटी मरियम के साथ पीसी कर खुद को पीड़ित बताया और कहा कि वह चोर नहीं हैं और जल्द ही पाकिस्तान लौटेंगे. उन्होंने कहा, ‘मेरा जेल से संघर्ष जारी रहेगा. यह मेरे संघर्ष का एक हिस्सा है.’

तब उन्होंने ‘सहानुभूति कार्ड’ खेलते हुए कहा था, ‘मैं वादा करता हूं कि मेरा संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक देश के लोगों को कुछ जनरल और जजों की ओर से उन पर थोपी गई दासता से मुक्त नहीं करा लेता. मैं देश से अपील करता हूं कि वे मेरे साथ आए और इस नाजुक क्षण में मुझे अकेला न छोड़ें.’ उन्होंने जल्द ही स्वदेश वापस लौटने की बात कही थी.

इसके कुछ ही दिनों के अंदर नवाज ने अपनी बेटी के साथ स्वदेश वापसी का ऐलान कर दिया. उनकी वापसी का ऐलान करना था कि पाकिस्तान सरकार उनको गिरफ्तार करने की योजनाएं बनाने लग गई. लेकिन नवाज अपनी गिरफ्तारी को यू ही जाया नहीं होने देना चाहते थे.

मां ने भी खेला ‘सहानुभूति कार्ड’

 

गिरफ्तार होने से पहले उन्होंने हर हथकंडे अपनाए. अपनी बेटी के साथ प्रेस के सामने आए और फिर अपनी बीमार बीवी कुलसुम शरीफ का जिक्र कर पाक जनता को एक पीड़ित के तौर पर साबित करने की कोशिश की. इसे उनकी सोची-समझी रणनीति का हिस्सा कहा जा सकता है. लंदन के अस्पताल में भर्ती कुलसुम कैंसर से जुझ रही हैं और उनकी हालत काफी गंभीर है.

दूसरी ओर, पाकिस्तान में रह रहीं नवाज की मां शमीम अख्तर ने गुरुवार को वीडियो संदेश जारी कर कहा कि वह बेटे नवाज और पोती मरियम को अकेले नहीं छोड़ेंगी. अगर नवाज को जेल हुई तो वह भी उनके साथ जेल जाएंगी. दोनों निर्दोष हैं और उनके खिलाफ साजिश की जा रही है.

‘मुशर्रफ जैसा बुजदिल नहीं’

इसके बाद पाकिस्तान के लिए रवाना होने से पहले लंदन में नवाज ने कहा, ‘मैं परवेज मुशर्रफ नहीं हूं कि छुपकर बुजदिल की तरह विदेश में बैठ जाऊंगा. मेरे खिलाफ जिसने साजिश की, वो देश के साथ बुरा खेल खेल रहा है. साल 1971 में भी ऐसा ही खेल खेला गया था और देश के दो टुकड़े हो गए थे.’

उनका इस मसले पर मुशर्रफ का जिक्र करना बेहद लाजिमी था क्योंकि नवाज की तरह पूरे देश को मालूम है कि पाक का यह पूर्व तानाशाह भ्रष्टाचार के मामले में देश से बाहर भगा हुआ है और उसकी छवि देश में बहुत अच्छी नहीं है. मुशर्रफ ही नहीं बल्कि देश के कई अन्य बड़े और रसूखदार नेता भी भ्रष्टाचार का आरोप लगने के बाद देश छोड़कर बाहर भाग गए और वापस पलटकर सामने नहीं आए.

जबकि इसके उलट नवाज ने भ्रष्टाचार मामले में लगातार सहयोग किया. लंदन में पॉश एवेनफील्ड हाउस में चार फ्लैटों के स्वामित्व से जुड़े एवेनफील्ड भ्रष्टाचार मामले में सौ से ज्यादा बार हुई सुनवाई में खुद नवाज करीब 90 मौकों पर खुद पेश हुए या फिर जांच में सहयोग दिया. इसके बाद सजा का ऐलान होने के एक हफ्ते के अंदर वह खुद स्वदेश लौट आए और गिरफ्तार हो गए.

इमरान खान के लिए ‘दुविधा’

खैर, नवाज और उनकी बेटी मरियम को लाहौर एयरपोर्ट से गिरफ्तार कर रावलपिंडी के आदियाला सेंट्रल जेल भेजा जाएगा. दोनों का पासपोर्ट जब्त कर लिया गया है. बहुत संभावना है कि दोनों अब कल कोर्ट से जमानत की अर्जी दाखिल कर सकते हैं क्योंकि पाक के कानून के अनुसार जमानत की अर्जी तभी दाखिल की जा सकती है जब उसने सरेंडर कर दिया हो.

दोनों के देश लौट आने के बाद वहां के राजनीतिक दलों को आम चुनाव के लिए नए सिरे से चुनावी रणनीति बनानी होगी क्योंकि यहां से पीएमएल-एन से अन्य दलों से बढ़त बना ली है. अब इमरान खान को केंद्र की सत्ता पर काबिज होना है तो शेष बचे 2 हफ्तों में एड़ी चोटी का जोर लगाना होगा.

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