अनुष्का और उनकी सहेलियों की खिदमत पर लगाई पाबंदी | जानिए किसने किया और क्यों !

नई दिल्ली : टीम इंडिया के विदेशी दौरों पर खिलाड़ियों के साथ उनकी पत्नियों का जाना अब आम बात है. अक्सर बुरे प्रदर्शन पर इस बात की आलोचना भी खूब होती है कि क्रिकेट इन दौरों पर इनकी पत्नियों का क्या काम. उस समय उनकी मौजूदगी खबरों में खूब सुर्खियां बटोरती है. इस बार भी टीम इंडिया के खिलाड़ियों के साथ उनकी पत्नियां दक्षिण अफ्रीका दौरे पर गई हैं. इस बार ये खबरें इसलिए भी ज्यादा अहम रहीं, क्योंकि हाल ही में अनुष्का शर्मा के साथ शादी के बंधन में बंधने वाले विराट कोहली अपनी पत्नी को इस दौरे पर लेकर गए.

विराट के अलावा रोहित शर्मा, शिखर धवन, उमेश यादव, भुवनेश्वर कुमार की पत्नियां भी उनके साथ गई हैं. शायद यही कारण रहा कि इस बार अफ्रीका दौरे में बीसीसीआई ने अपने स्टार क्रिकेटरों की पत्नियों के घूमने-फिरने और मौजमस्ती के लिए एक अलग से अधिकारी भेजने की व्यवस्था की थी. लेकिन बीसीसीआई की योजना पर एक शख्स ने पूरी तरह से पानी फेर दिया. ये हैं सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई गई प्रशासकों की समिति के सीओए विनोद राय.

मुंबई मिरर की एक रिपोर्ट के मुताबिक बीसीसीआई ने इस बार के दौरे पर क्रिकेटरों की पत्नियों के लिए अलग से तमाम इंतजाम करने के लिए मयंक पारिख को लायजनिंग अधिकारी बनाकर 4 जनवरी को केपटाउन भेजने का बंदोबस्त कर दिया था. लेकिन 3 जनवरी को ऐन वक्त पर सीओए विनोद राय ने बोर्ड की इस योजना को फेल कर दिया. उन्होंने कहा कि जब ऋषिकेश उपाध्याय के तौर पर पहले से ही एक लायजनिंग अधिकारी टीम इंडिया के साथ है तो सिर्फ क्रिकेटरों की पत्नियों के लिए अलग से अधिकारी भेजने की जरूरत नहीं है.

क्यों की गई थी पहली बार ऐसी मांग
क्रिकेटरों की पत्नियां पहले भी विदेशी दौरों पर साथ गई हैं. लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ कि उनके लिए एक अधिकारी अलग से नियुक्त किया गया हो. यह पहली बार है जब बीसीसीआई ने इस तरह की पहल की है. तो आखिर बोर्ड ने ऐसी पहल क्यों की. कहा जा रहा है कि चूंकि विराट कोहली की अभी हाल ही में शादी हुई है और वह टीम इंडिया के इस समय सबसे बड़े सितारे हैं, ऐसे में उन्हें ये स्पेशल ट्रीटमेंट देने के इरादे से शायद बोर्ड ने ये पहल की हो. हालांकि इस बारे में अब तक कुछ भी साफ नहीं है.

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