Spicejet बन सकती है बायो-जेट फ्यूल से विमान उड़ाने वाली भारत की पहली कंपनी !

लंदन से एम्सटर्डम के बीच सबसे पहले उड़ी थी बायोजेट फ्यूल वाली फ्लाइट

नई दिल्‍ली

स्पाइसजेट भारत में बायोजेट फ्यूल से विमान उड़ाने वाली पहली एयरलाइन कंपनी बन सकती है। कंपनी जल्द ही इस फ्लाइट का डेमो देने जा रही है। इसकी तैयारी पूरी कर ली गई है। सिर्फ सरकार की तरफ से आधिकारिक मंजूरी बाकी है। कंपनी ने आगामी 27 अगस्त ने बायोजेट फ्यूल से विमान उड़ान का डेमो देना तय किया था, लेकिन फिलहाल किसी कारण से इसे टाल दिया गया है। इस कार्यक्रम में ट्रांसपोर्ट मंत्री नितिन गडकरी, नागरिक उड्डयन मंत्री सुरेश प्रभु, पेट्रोलियम मंत्री ध्रमेंद्र प्रधान एवं विज्ञान व प्रौद्योगिक मंत्री डॉ. हर्षवर्धन शामिल होने वाले थे।

2008 में बायो-जेट फ्यूल की पहली उड़ान

किसी कमर्शियल एयरलाइन द्वारा सबसे पहले 24 फरवरी, 2008 को बायोजेट फ्यूल का इस्तेमाल किया गया था। वर्जिन अटलांटिक की फ्लाइट ने इस दिन बायो-जेट फ्यूल की मदद से लंदन के हीथ्रो से एम्सटर्डम के बीच उड़ान भरी थी। इस फ्लाइट के लिए इस्तेमाल होने वाले बायो-जेट फ्यूल को ब्राजील के कोकोनट्स एवं बाबास्सु नट्स के मिक्सचर से बनाया गया था।

लंबी दूरी में क्वांटस प्लेन में पहली बार हुआ बायो-जेट फ्यूल का इस्तेमाल

बायो-जेट के इस्तेमाल से लंबी दूरी तय करने वाले पहला विमान क्वांटस प्लेन था। सरसों के इस्तेमाल इस बायो-जेट फ्यूल का निर्माण किया गया था। 30 जनवरी, 2018 को यह फ्लाइट आस्ट्रेलिया से अमेरिका के बीच उड़ान भरी थी।

क्लीन एनर्जी से 1 अरब यात्रियों की यात्रा का लक्ष्य

इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (आईएटीए) ने हाल ही में वर्ष 2025 तक एक अरब यात्रियों को क्लीन एनर्जी वाले फ्लाइट में यात्रा कराने का लक्ष्य रखा है। हालांकि पर्यावरण विशेषज्ञों के मुताबिक लागत अधिक होने की वजह से बायो-जेट फ्यूल का इस्तेमाल व्यावहारिक नहीं है।

कैसे बनता है बायो-जेट फ्यूल

बायो-जेट फ्यूल का उत्पादन विभिन्न प्रकार के कृषि उत्पादों की मदद से हो सकता है। इनमें तिलहन फसल, गन्ना व इस प्रकार के अन्य उत्पाद शामिल हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक गन्ने से अन्य उत्पादों के मुकाबले बायो-जेट फ्यूल आसानी से अधिक मात्रा में बनाए जा सकते है।

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