तृणमूल को घेरने की कोशिश में सीबीआई

-कुणाल को सरकारी गवाह बनाने की योजना

कोलकाता : जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव करीब आ रहा है, केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई सारदा चिटफंड घोटाले में सत्ताधारी दल तृणमूल कांग्रेस पर नकेल कसने की दिशा में आगे बढ़ रही है। दूसरे शब्दों में सीबीआई लोकसभा चुनाव के पहले तृणमूल को घेरने की कोशिश कर रही है। और इसके लिए अब उसने पार्टी के ही पूर्व सांसद कुणाल घोष को बतौर हथियार(सरकारी गवाह) बनाने का फैसला किया है। कानून की भाषा में सीबीआई फौजदारी कानून की धारा 164 के तहत कुणाल का इकबालिया बयान मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज कराना चाहती है। हालांकि, कुणाल ने इस बारे में हां या ना, कोई टिप्पणी नहीं की है।

मालूम हो कि सीबीआई द्वारा सारदा चिटफंड घोटाले में गिरफ्तारी के बाद कुणाल ने 2013 व 2015 में इस बारे में दो बार अदालत में अर्जी देकर अपना बयान रिकार्ड कराने की अनुमति मांगी थी। लेकिन दोनों ही बार किसी ने किसी कारण से ऐसा नहीं हो सका। पहली(2013) बार दमदम जेल में कैद रहने के दौरान उन्हें पुलिस ने दूसरे थाने में दर्ज मामले का हवाला देते हुए वहां से हटा कर बयान देने से वंचित कर दिया था। साल्टलेक अदालत ने उन्हें नवम्बर(2013) में 48 घंटे के अंदर बयान दर्ज करने का आदेश दिया था। दूसरी बार 2015 में भी जांच एजेंसी ने यह कहते हुए उनका बयान रिकार्ड नहीं करवाया कि फिलहाल उन्हें उसकी कोई जरुरत नहीं है। इससे पहले 2014 में कुणाल ने 91 पन्ने का पत्र सीबीआई को लिखा था। इसमें उन्होंने सारदा के गठन से लेकर उसके विस्तार, इससे जुड़े लोगों तथा लाभान्वित लोगों के बारे में विस्तार से बताया था। लेकिन गिरफ्तारी के बाद तृणमूल ने उन्हें पार्टी से बहिष्कार कर दिया था। हालांकि, हाल के दिनों में वे तृणमूल के करीब देखे जा रहे हैं। यहां तक कि 21 जुलाई की धर्मतल्ला में सुप्रीमो ममता बनर्जी की शहीद रैली में भी कुणाल को देखा गया था। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या सीबीआई तृणमूल को घेरने के लिए उसी के पूर्व सांसद को हथियार बनाने की कोशिश तो नहीं कर रही है??वैसे कुणाल इस बारे में खामोश रहना ही बेहतर समझ रहे हैं।

 

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