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उद्योग जगत के लिए ऐतिहासिक रहा बजट-कोलकाता

कोलकाता, समाज्ञा रिपोर्टर

हेमंत बांगड़ : मर्चेंट चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के प्रेसिडेंट हेमंत बांगड़ ने कहा कि यह बजट कई मामलों में ऐतिहासिक है। रेल व साधारण बजट एक साथ कर योजना व गैर योजनागत खर्चे को कम किया गया है। उन्होंने एमएसएमई क्षेत्र में कॉरपोरेट टैक्स को 30 फीसदी से घटाकर 25 फीसदी किए जाने को सराहा।उन्होंने कहा कि ढाई लाख से पांच लाख रुपये की सालाना आय पर कर 10 फीसदी से घटाकर पांच फीसदी किए जाने कर में इजाफा होगा। हालांकि इस बजट में निवेश बढ़ाने के लिए कोई विशेष अधिनियम न लाए जाने पर निराशा जतायी। हेमंत बांगड़ के अनुसार ढ़ाचागत मुद्दों को सुलझाकर वित्तीय विकास को गति दी जा सकती थी।

सेल के चेयरमैन पीके सिंह ने कहा कि 2017-18 के लिए पूंजीगत व्यय में 25.4 फीसदी बढ़ोतरी कर देश के सामग्रिक विकास का लक्ष्य बनाया गया है। सेल चेयरमैन ने इन्फ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र के विकास के लिए मिले 3,96,135 करोड़ रुपये की भी सराहना की। उन्होंने रेलवे लाइनों के विकास, गरीबों के लिए एक करोड़ घर, शहरों में बेहतर कनेक्टिविटी, वहन करने योग्य हाउसिंग योजना को आर्थिक व्यवस्था के विकास में सहायक करार दिया। ग्रामीण इलाकों व एमएसएमई के विकास की दिशा में उठाए कदम की सराहना की।

उन्होंने कहा एमएसएमई क्षेत्र के विकास के लिए उठाए गए कदम को इस्पात उद्योग के लिए सराहनीय करार दिया।

गुजरात एनआरई कोक लिमिटेड के सीएमडी अरूण कुमार जगतरामका ने केंद्रीय बजट को मिलाजुला करार देते हुए कहा कि इसमें निरंतरता व पारदर्शिता बरतने का प्रयास किया गया है। इसमें स्वच्छ भारत पर जोर दिया गया है। इस बजट में सभी क्षेत्रों के लिए कुछ न कुछ है। हालांकि उन्होंने केंद्रीय बजट को उम्मीद पर खरा उतरने से इनकार किया।

श्रीराम प्रॉपर्टीज के एमडी एम मुरली ने केन्द्रीय बजट को प्रगतिशील और संतुलित बजट करार दिया। उनका मानना है कि इस बजट से भ्रष्टतंत्र में सुधार व पारदर्शिता आएगी। मुरली ने कहा कि केंद्र सरकार ने बजट में कमजोर, किसान और ग्रामीण वर्ग व उनके रोजगार पर विशेष जोर दिया है।

विलेज फिनैन्शल सर्विसेज प्राइवेट लि. सीईओ व एमडी कुलदीप मैत्री ने केन्द्रीय बजट को उचित व व्यापक बताया है। उन्होंने कहा कि इस बजट में कुछ भी अप्रत्याशित नहीं है हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों के विकास व गरीबी उन्मूलन और फसल बीमा योजना के बारे में लिए गए फैसले स्वागतयोग्य हैं।

मुरूगप्पा ग्रुप के चेयरमैन वेलेयान ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि इस वर्ष का केन्द्रीय बजट राजस्व अनुशासन और विकास का उचित सम्मिश्रण है। इसमें ग्रामीण विकास, कृषि क्षेत्र समेत फसल बीमा योजना स्वागत योग्य कदम है।

जी जे एफ के चेयरमैन नितीन खंडेलवाल ने केन्द्रीय बजट पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि इसवर्ष का बजट खासकर किसान और ग्रामीण भारत का बजट है। कृषि विकास पर जोर देना देश की जीडीपी में विकास का प्रयास है। इसमे कृषि और ग्रामीण रोजगार के साथ डिजिटल कैश ट्रांजेक्शन पर जोर दिया गया है।

ललित बेरीवाल : श्याम स्टील के ललित बेरीवाल ने केंद्रीय बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए करीब चार लाख करोड़ रुपये के अनुमोदन को सराहा। उन्होंने कहा कि इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास से इस्पात उद्योग का भी विकास होगा व देश के सामूहिक विकास में भी इसकी अहम भूमिका होगी। उन्होंने मध्यम उद्योगों पर कॉरपोरेट टैक्स में कटौती की प्रशंसा करते हुए कहा कि देश की जीडीपी में इनका प्रमुख हिस्सा होता है। टैक्स में कटौती से उद्योग का विकास होगा रोजगार मिलेगा व देश की जीडीपी भी बढ़ेगी। इन्होंने बजट को पांच में से साढ़े चार अंक दिए।

कैलाश सुल्तानिया : इन्होंने बजट को व्यापारियों के लिए निराशाजनक करार दिया। कैलाश सुल्तानिया ने कहा कि यह बजट मुख्यत: राजनीतिक बजट है। मध्यम व छोटे उद्योगों को बढ़ावा देने का कोई प्रयास नहीं किया गया है। इन्होंने केंद्रीय बजट को पांच में से केवल एक अंक देना उचित समझा।

बीएल मित्तल : इन्होंने केंद्रीय बजट को उद्योगों व ग्रामीणों जगत के लिए संतोषजनक करार देते हुए इसे पांच में चार अंक दिए।

सीताराम शर्मा (वरिष्ठ उपाध्यक्ष, भारत चेंबर ऑफ कॉमर्स) ः बजट मिला जुलाकर मध्यम है। आम जनता की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरे। कृषि और ग्रामीण क्षेत्र पर अधिक जोर दिया गया है। हालांकि सड़क और मनरेगा, रेलवे पर अधिक खर्च करने से आर्थिक लाभ होने की उम्मीद है।

आदित्य अग्रवाल (ईमामी) ःबहुत ही अच्छा बजट है। दो साल में 7 प्रतिशत से 7-8 प्रतिशत विकास दर की उम्मीद है। ग्रामीण इलाकों में निवेश पर फोकस रहेगा। शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य तक उद्यमि से लेकर उद्योग तक टैक्स कटौती, हर किसी के सपने को साकर करने का ठोस कदम इस बजट में साफ-साफ नजर आता है।

रत्नेश्‍वर चौधरी (शेरा गंजी) : सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) कंपनियों को अधिक व्यवहार्य बनाने के लिए 50 करोड़ रुपये तक का वार्षिक कारोबार करने वाली छोटी कंपनियों के लिए आयकर घटाकर 25 प्रतिशत करने का प्रस्ताव किया गया है। इस बजट से मध्यमवर्ग के व्यवसाईयों को प्रोत्साहन मिलेगा। रेलवे में आईआरसीटीसी के सेवा कर में छूट से ऑनलाईन को बढ़ावा मिलेगा।

जय प्रकाश सिंह (सिलवन प्लाई) : मध्यमवर्ग व गरीबों को राहत मिला है। नोटबंदी के बाद पेश किए गए बजट में सरकार का पूरा जोर गरीब, गांव, किसान और मिडिल क्लास पर रहा। सरकार ने काफी हद तक संतुलित बजट पेश करने की कोशिश की है। लगभग हर पक्ष को खुश करने का प्रयास किया गया है।

पप्पू बाजोरिया (हैंडलूम कॉटेज) : टैक्स में मध्यम वर्ग को राहत देने का प्रयास किया गया है। डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढावा दिए जाने से भ्रष्टाचार व कालेधन का खात्मा होगा, प्रणाली स्वच्छ होगी। आधार आधारित भुगतान प्रणाली शुरू करेगी ताकि देश के दूरदराज के इलाकों में रह रहे लोगों में डिजिटल लेनदेन को बढावा दिया जा सके।

देव कुमार सराफ (आनंदलोक) – बजट बहुत अच्छा है। उद्योग के विकास को ध्यान में रखा गया है। आमदनी को बढ़ाने के लिए सरकार ने विनिवेश के लक्ष्य को पिछले साल पर ही कायम रखा है। मोदी की सरकार ने एक साफ विजन के साथ निश्‍चित दिशा में बढ़ने और बढ़ाने वाला बजट पेश किया है।

सुबोध छाजेड़ (जयपान)  हर साल की तरह भी पुराने चीज को नये तरीके से पेश किया है। इस बजट का कोई आधार नहीं है। आम जनता के लिए बजट निराशाजनक है। बजट गरीबों को कमजोर बनाने वाला है।

कृष्णा सिंह (गोपाल टाइल्स) – सरकार की तरफ से मिलाजुला बजट पेश किया गया। आशा के अनुरूप बजट है। हालांकि नोटबंदी के बाद जो उम्मीद थी, वैसा कुछ भी नहीं हुआ। जीएसटी लागू करने का फैसला सराहनीय है। वहीं डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देने के लिए ऑनलाईन टिकट पर छूट देना सराहनीय है।

सुशील गोयल (व्यवसायी) : आम आदमी के लिए विशेष कुछ भी नहीं है। हर बार की तरह इस बार भी तोड़ मरोड़ कर पेश किया गया। व्यपारियों के उम्मीदों पर खरा नहीं उतरे।

शोभित अग्रवाल : चार्टर्ड अकाउंटेंट शोभित अग्रवाल ने कहा कि व्यक्तिगत रूप से कम आय व कम वेतन वाले लोगों को कर में राहत दी गयी है। छोटी कंपनियों के कर में कटौती कर उनके विकास के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।

महेश शर्मा (नेचुरल ग्रुप) – वित्त मंत्री द्वारा पेश किया गया बजट पूरी तरह से दिशाहीन है। इस बजट का कोई मतलब नहीं है। सरकार ने बजट के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की है।

दीपक सर्राफ (व्यवसायी) : पांच राज्य के चुनाव को ध्यान में रखकर बजट को पेश किया गया चुनाव से पूरी तरह से प्रेरित है यह आम बजट। इस बजट में कोई भी जनपयोगी परियोजनाओं के बारे में उल्लेख नहीं किया गया है।

विकास शर्मा(व्यवसायी) :आम जनता के लिए आम बजट पेश किया गया। इसमें कुछ भी नयापन देखने को नहीं मिला। वित्त मंत्री ने पुरानी चीजों को नये अंदाज में पेश किया है, जिसका कोई आधार नहीं है।

विकास धनानिया(सीए) :जीएसटी व एक्साईज के रेट में बदलाव नहीं किया गया है। रियल स्टेट में मंदी चल रही है उसे दूर करने का प्रयास किया गया है। करदाताओं के आधार को बढ़ाने के साथ – साथ कैश के कम इस्तेमाल पर जोर दिया गया है। गरीबों के सर्वांगिण विकास ध्यान रखा गया है।