समाज्ञा

डीएम कार्यालय के कर्मचारी को मिली ईमानदारी की सजा

  1.  2 साल में छह बार हो चुका है तबादला,
  2. विरोध में डीएम कार्यालय के सामने ही धरने पर बैठा
 
आसनसोल :  आज के भारत में सब कुछ बिकता है । वह चाहे सामान हो या फिर ईमानदारी । बस खरीददार के पास पैसे होने चाहिए । लेकिन अगर इस मामले में कोई खुदगर्जी या ईमानदारी दिखाएं तो उसे या तो बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है।  या फिर इस तरह से प्रताड़ित किया जाता है कि वह खुद-ब-खुद गलत रास्ते पकड़ ले।
 
 कुछ ऐसा ही मामला पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्दवान जिला कार्यालय से भी सामने आया है। यहां जिला कार्यालय में कार्यरत शुभंकर बनर्जी नामक एक कर्मी को उसकी ईमानदारी उस पर ही भारी पड़ती दिख रही है । अन्याय और घूसखोरी का प्रतिवाद करने की वजह से पहले ही उसका 2 साल के कार्यकाल के दौरान 6 बार ट्रांसफर की  जा चुकी है।  यही नही आरोप है कि इसके बाद पश्चिम बर्दवान जिला कार्यालय में कार्यरत होने के दौरान सीनियर द्वारा बार-बार उसे मानसिक रूप से परेशान किया जाता रहा है।  यही नही उसे भी घूस लेने जैसे मामलों में शामिल होने का दबाव डाला जा रहा था।  लेकिन जब उसने मानने से इनकार कर दिया तो उसे प्रमोशन देखकर कहीं बाहर ट्रांसफर किया जा रहा है । इस घटना से नाराज शुभंकर बनर्जी ने ना केवल इसका प्रतिवाद किया । बल्कि ट्रांसफर रोकने की मांग करते हुए जिला कार्यालय के सामने अनशन पर बैठ गया है । शुभंकर की माने तो इस घटना को लेकर उसने कई आला अधिकारियों से भी बातचीत कर मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की।  लेकिन उसकी एक नहीं सुनी गई।  जिसके बाद बाध्य होकर ही उसने यह  अनशन का रास्ता अख्तियार किया है।
 
 
इधर इस घटना को लेकर पश्चिम बर्दवान जिले के जिला शासक सासंक सेठी ने बताया कि उनके द्वारा मिली शिकायत के बाद एडीएम इस मामले की जांच कर रहे है। उन्होंने कहा कि शुभंकर को फिलहाल अपना हठ छोड़कर ड्यूटी ज्वाइन करने की बात कही गई है। हम मामले की जांच कर रहे है। शुभंकर द्वारा किया गया यह काम सर्विस और कंडक रूल के खिलाफ हसि और यह किसी तरह से मान्य नही होगा।