नियम कायदों के दायरे में आया रेड लाइट एरिया-कोलकाता

कोलकाता –  दशकों से बिना किसी नियम-कायदे के चल रहा जिस्मफरोशी का धंधा भी अब उसूलों के दायरे में आ गया है। एशिया का सबसे बड़ा रेडलाइट एरिया कोलकाता का सोनागाछी है। एक दौर था, जब यहां लड़कियों को जबरन देह व्यापार में धकेल दिया जाता था। न कोई सुनने वाला और न उनके लिए बोलने वाला। लेकिन, अब वो जमाना नहीं है। सोनागाछी समेत पश्चिम बंगाल के विभिन्न रेडलाइट एरिया में लाई जाने वाली लड़कियों पर अब कड़ी नजर रखी जाती है। ये काम कोई और नहीं, यौनकर्मियां ही करती हैं। उनके संगठन दुरबार महिला समन्वय समिति के तत्वावधान में नियामक बोर्ड गठित किए गए हैं। दुरबार की सचिव काजल बोस ने बताया कि बंगाल के 30 से अधिक रेडलाइट एरिया में ऐसे बोर्ड गठित किए जा चुके हैं। कोलकाता के सोनागाछी, रामबगान, खिदिरपुर, कालीघाट, बर्द्धमान के कालना व दुर्गापुर, नदिया के शांतिपुर, उत्तर 24 परगना जिले के बशीरहाट समेत विभिन्न जिलों में इस तरह के बोर्ड हैं। उनका काम पेशे में आने वाली लड़कियों पर नजर रखना है। इस बात का पता लगाया जाता है कि वे अपनी मर्जी से इस पेशे से जुड़ रही हैं या उन्हें जबरन धकेला जा रहा है। उनकी उम्र की भी जांच की जाती है। इस बाबत हड्डियों का एक्स-रे कराया जाता है। जिन्हें झांसा देकर या अन्य तरीकों से लाया गया है, उन्हें उत्तर कोलकाता के बीडन स्ट्रीट के पास स्थित दुरबार के होम में लाकर रखा जाता है। फिर वापस उनके घर भेजने की व्यवस्था की जाती है। जो अपनी मर्जी से इस पेशे से जुड़ना चाहती हैं, उन्हें इसके बारे में विस्तार से समझाया जाता है। 18 साल की उम्र से पहले उन्हें इस धंधे में आने की अनुमति नहीं है। बोर्ड में 50 फीसद यौनकर्मी व 50 फीसद स्थानीय जन प्रतिनिधि अथवा विशिष्ट लोग शामिल होते हैं। कोलकाता में तस्करी रोधी विंग की प्रमुख सरबरी भट्टाचार्य ने कहा कि अब सोनागाछी या बंगाल के अन्य रेड लाइट एरिया में कम उम्र की या जबरन लाई गई यौन कर्मी मिलना मुश्किल है। उनका कहना है कि बोर्ड के लोग संकीर्ण गलियों में चुपचाप चलते हुए हर नई लड़की पर नजर रखते हैं। वे दलालों से सोनागाछी में चल रहे क्रियाकलापों की जानकारी लेते हैं। अगर कुछ गलत मिलता है तो तत्काल एक्शन लिया जाता है।

 

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