5 महीने से हावड़ा स्टेशन बना है वृद्धा का आशियाना

बेकबागान की रहने वाली है वृद्धा

बेटे ने वृद्धा को घर ले जाने से किया इनकार

हावड़ा : रोटी, कपड़ा, और मकान हरेक इन्सान के लिये जरूरी है लेकिन इस समाज में कुछ लोगों ऐसे भी है जो हालात के मारे हुए हैं। दरदर भटकते इन लोगों के लिए रेलवे स्टेशन किसी मंदिर से कम नहीं होता है। इसी प्रकार गत 5 महीने से हावड़ा स्टेशन भी एक असहाय और लाचार वृद्धा का आशियाना बना हुआ है। वृद्धा का नाम स्वपना चटर्जी है। वह कोलकाता के बेकबागान की रहने वाली है। वहीं आरपीएफ व जीआरपी को मामले की जानकारी होते ही सुरक्षा के मद्देनजर अधिकारियों ने वृद्धा को स्टेशन परिसर से बाहर निकाल दिया।

वृद्धा ने बताया कि वह बेकबागान में किराये के घर में रहती थी। उसके पति राजेंद्र चटर्जी एक निजी बैंक कर्मचारी थे। गत वर्ष 2009 में उसके पति की मौत हो गयी जिसके बाद से वह अपने दीदी के घर रहने लगी थी। वहीं वृद्धा का बेटा एयरपोर्ट के समीप एक निजी कंपनी में काम करता था और अपनी मां को कभीकभी पैसे देता था। 6 महीने पहले बेटे की भी नौकरी चली गयी जिसके बाद से वह भी पैसे देना बंद कर दिया। इस कारण वृद्धा की दीदी ने भी उसे घर से निकाल दिया। वृद्धा गुजारा करने के लिए रूबी में एक निजी स्कूल में क्लर्क के रूप में काम करने लगी लेकिन यहां से भी उसे निकाल दिया गया। अंत में वृद्धा को हारकर हावड़ा स्टेशन में आश्रय लेना पड़ा। वृद्धा ने बताया कि इसके बाद से वह स्टेशन में ही भींग मांगकर गुजारा कर रही है। इधर, आरपीएफ और जीआरपी अधिकारियों ने बताया कि वृद्धा के बेटे से संपर्क कर उसे घर ले जाने को कहा लेकिन बेटे ने मना कर दिया। अब वह गत 5 दिनों से स्टेशन के बाहर खुले आकाश के नीचे जीवन यापन करने को मजबूर है।

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