असम में बंगाली खदेड़ो अभियान : ममता

 
आरोप, वोट बैंक की राजनीति कर रही मोदी सरकार 
 
 कोलकाता : असम में सोमवार को जारी नैशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन(एनआरसी) के फाइनल ड्राफ्ट पर राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है। नैशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन(एनआरसी) के अंतिम मसौदे में 40 लाख आवेदकों के नाम शामिल नहीं किए जाने के मुद्दे पर चिंता जाहिर करते हुए मुख्रमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को कहा कि वे भारतीर नागरिक अपनी ही जमीन पर शरणार्थी हो गए हैं। ममता ने रह आरोप भी लगारा कि केंद्र की मोदी सरकार वोट बैंक की राजनीति कर रही है। 
जरूरी होने पर सरकार कानून में संशोधन करे। उन्होंने आरोप लगाया कि नागरिक पंजीयन के नाम असम से बंगाली खदेड़ो अभियान चल रहा है। कुछ समुदाय और भाषा विशेष के लोगों को जबरन निशाना बनाया जा रहा है। दिल्ली के लिए रवाना होने से पहले नवान्न में पत्रकारों से बातचीत में मुख्रमंत्री ने कहा कि वह इस मुद्दे पर चर्चा के लिए केंद्रीर मंत्री राजनाथ सिंह से समर मांगेंगी। उन्होंने कहा कि ऐसे संवेदनशील मुद्दे पर सरकार को राजनीति से बाज आना चाहिए। केंद्र की नीति है कि फूट डालो और राज करो। उनकी राजनीति ही लिंचिंग की, लोगों को बांटने की है। वे गृहमंत्री से कहना चाहेंगीं कि निष्पक्षता के अपने दावे पर कायम रहें और 40 लाख लोगों के भविष्य के बारे में सोचें।
टीम जाएगी असम : उन्होंने कहा कि वे पार्टी के सांसदों की एक टीम असम भेज रही हैंं और जरुरत पड़ी तो वे खूद भी वहां जाएंगीं। रह पूछे जाने पर कि क्रा पश्‍चिम बंगाल सरकार उन लोगों को आश्रर देगी जिनके नाम एनआरसी के अंतिम मसौदे में शामिल नहीं हैं, ममता ने कहा कि उनके अपने घर हैं। वे असम के निवासी हैं। रदि वे आना चाहेंगे तो हम इस बारे में सोचेंगे। लेकिन उन्हें निकाला ही क्रों जाए? वे भारतीर हैं लेकिन वे अपने ही देश में शरणार्थी बन गए हैं। ममता ने रह दावा भी किरा कि कुछ ऐसे लोगों के भी नाम अंतिम मसौदे से हटा दिए गए हैं जिनके पास पासपोर्ट, आधार और वोटर कार्ड हैं। अपने दावे के पक्ष में उन्होंने कुछ दस्तावेज भी दिखाए। केंद्र की भाजपा सरकार पर 40 लाख लोगों को जबरन निकालने की कोशिश करने का आरोप लगाते हुए ममता ने कहा कि रह गंभीर चिंता की बात है। वे हमारे भाई-बहन की तरह हैं। 
इंटरनेट सेवा बंद : इंटरनेट सेवाएं खत्म कर दी गई हैं। हम असम में लोगों से संपर्क नहीं कर पा रहे। ममता ने कहा कि सिटिजन रजिस्टर की लिस्ट से बंगाली प्रभावित होंगे। ममता ने पूछा कि जिन 40 लाख लोगों के नाम लिस्ट में नहीं हैं, वे कहां जाएंगे? क्या सरकार के पास उनके पुनर्वास के लिए कोई प्रोग्राम है? आखिरकार इसे बंगाल को ही भुगतना पड़ेगा। इस बीच सोमवार को लिस्ट पर तृणमूल सांसदों ने संसद में जमकर हंगामा किया। मालूम हो कि कड़ी सुरक्षा के बीच सोमवार को एनआरसी का अंतिम मसौदा प्रकाशित किरा गरा। इसमें 3.29 करोड़ आवेदकों में से 2.89 करोड़ के नाम शामिल किए गए हैं। 

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