समाज्ञा

डीए दया नहीं, कानूनी अधिकार : हाईकोर्ट

राज्य सरकार की हार, कर्मियों की बड़ी जीत

सैट को 2 माह में फैसला देने का आदेश दिया

कोलकाता :  सरकारी कर्मियों को डीए मामले में बड़ी राहत देते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट ने शुक्रवार को स्पष्ट कर दिया कि डीए किसी सरकार का दया का दाननहीं है। यह सरकारी कर्मियों का कानूनी अधिकार है। सरकारी कर्मचारी रोपा कानून के तहत डीए पाते हैं। डीए किसी भी सरकार की कर्मचारियों पर दया नहीं है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की डीए मामले में दया संबंधी दलील अस्वीकर करते हुए एसएटी(सैट) द्वारा दिए गए फैसले को रद्द कर दिया तथा कहा कि सरकारी कर्मियों को डीए देने होगा। वहीं, हाईकोर्ट ने राज्य के कर्मियों को दूसरे राज्यों में कार्यरत राज्य कर्मियों के बराबर डीए देने के राज्य कर्मियों की मांग व राज्य सरकार के कर्मियों को केंद्र सरकार के कर्मियों के बराबर डीए मिलेगा या नहीं, इसका फैसला हाईकोर्ट ने एसएटी(सैट) पर छोड़ दिया तथा कहा कि बिना स्थगन के मामले की सुनवाई 2 माह में खत्म करके फैसला देना होगा।

मालूम हो कि सरकारी कर्मचारियों ने 21 नवम्बर 2016 को एसएटी(सैट) में बकाया डीए संबंधी एक मामला दर्ज किया था। मामले की सुनवाई के बाद फरवरी 2017 में एसएटी(सैट) ने अपने फैसले में कहा कि डीए सरकार की कर्मियों को दिया जाने वाला दया का दया है, उनका अधिकार नहीं। डीए देना या नहीं देना सरकार के फैसले पर निर्भर करता है। एसएटी(सैट) के फैसले के बाद इस पर काफी विवाद हुआ था। आखिरकार कर्मचारियों के कई संगठनों ने एसएटी(सैट) के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की थी। लगभग डेढ़ साल चले मुकदमे के बाद शुक्रवार को सरकारी कर्मियों के पक्ष में न्यायाधीश देवाशीष करगुप्ता व न्यायाधीश शेखर बबी सराफ की खंड पीठ ने अपना फैसला सुनाया़। फैसला सुनाते हुए खंड पीठ ने एसएटी(सैट) के आदेश को पूरी तरह खारिज कर दिया और कहा कि डीए सरकार का दया का दान नहीं बल्की कर्मचारियों का कानूनी हक है। साथ ही न्यायालय ने एक और आदेश देते हुए कहा कि महंगाई के साथ ही सरकारी कर्मियों की डीए बढ़ेगी। अखिल भारतीय स्तर पर महंगाई सूचक के अनुसार ही डीए की बढ़ोतरी होगी। फिलहाल राज्य सरकार के कर्मचारी केंद्र के मुकाबले लगभग 47 फीसदी कम डीए पाते हैं। न्यायालय ने कर्मचारियों की उस अपील पर भी एसएटी(सैट) को फैसला देने के आदेश दिया है जिसमें कहा गया था कि दिल्ली व चेन्नई में कार्यरत सरकारी कर्मचारी केंद्र सरकार के कर्मियों के बराबर डीए पाएंगे जबकि राज्य सरकार के कर्मचारी इससे वंचित होंगे, क्यों? न्यायालय ने इस बारे में भी एसएटी(सैट) को 2 माह के अंदर फैसला देने के लिए कहा है। शुक्रवार को हाईकोर्ट के फैसले के बाद राज्य सरकार पर डीए भूगतान को लेकर दबाव काफी बढ़ गया है। इससे पहले राज्य सरकार ने न्यायालय को बताया था कि सरकार 2019 के जनवरी से बढ़ी डीए देने वाली है। इस पर न्यायालय ने कहा था कि बढ़ती महंगाई के दौर में जनवरी से डीए देने का क्या औचित्य है?? इस बीच न्यायालय के फैसले पर संतोष व्यक्त करते हुए सरकारी कर्मियों के संगठनों ने कहा है कि उम्मीद है कि केंद्र व राज्य सरकार के कर्मियों के बीच डीए के 49 फीसदी के अंतर को खत्म कर देगा।