विद्या मनुष्य को जीने की कला सिखाती है : राज्यपाल

कोलकाता, समाज्ञा
परिवर्तन के पीछे की शक्ति शिक्षा होती है, इस लिए कहा जाता है कि विद्या मनुष्य को जीने की कला सिखाती है। पश्‍चिम बंगीय मारवाड़ी सम्मेलन शिक्षा कोष द्वारा आयोजित 32 वें स्कूल फीस वितरण समारोह के दौरान पश्‍चिम बंगाल के राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी ने उक्त बातें कहीं। उन्होंने कहा कि विद्या ही समस्त मानवीय गुणों का कारण है। शिक्षा से विनयशील्ता आती है। भारत की शिक्षा व्यववस्था में नया परिवर्तन देखा गया है, नारी शिक्षा का विकास हो रहा है। नारी पढ़ रही है और बढ़ रही है। इसके साथ ही राज्यपाल ने पश्‍चिम बंगीय मारवाड़ी सम्मेलन शिक्षा कोष के कार्यों को सराहा और सदस्यों की प्रशंसा की। कार्यक्रम की शुरुआत अग्रसेन बालिका शिक्षा सदन की छात्राओं द्वारा गणेश वेदना से साथ की गयी। विशिष्ट अतिथि श्याम सुंदर बेरिवाल ने कहा कि इस ट्रस्ट को बनाने का उद्देश्य जरूरतमंदों में शिक्षा प्रदान करना था। कार्यक्रम में उपस्थित विद्यार्थियों को उन्होंने कहा कि यहीं समय है जब सभी शिक्षा प्राप्त कर उन्नति की राह पर चलते हैं। ऐसे समय में पढ़ाई पर ध्यान दें न कि मोबाइल पर। वहीं उन्होंने बच्चों को अपनी मात्रभाषा का सम्मान करने का आग्रह किया। अध्यक्ष ब्रह्मानंद अग्रवाला ने स्वागत भाषम में बताया कि ट्रस्ट पिछले 31 वषों से जरूरतमंद बच्चें के शिक्षा के लिए सहातया करती आ रही है। ट्रस्ट का एक ही लक्ष्य है कि कोई भी बच्च शिक्षा से वंचित न रहे। सचिव किशन लाल बजाज ने कहा कि कई लोग केवल समाज कल्याण की बातें करते हैं। उन लोगों को समज कल्याण के नाम पर गलत जगह रुपये खर्च न कर सही काम में लगाना चाहिए। ट्रस्टी विश्‍वनाथ केडिया ने ट्रस् के कार्यों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। अस्वस्थ्य होने की वजह से अशोक तोडी उपस्थित नहीं हो पाए मगर उन्होंने संदेश के माध्यम से बताया कि बच्चोें का विकास ही देश का विकास है। वे बच्चों की शिक्षा में मदद करने के लिए हमेशा तत्पर रहेंगे। स्कूल फीस वितरण के तहत 92 स्कूलों के लगभग 1100 जरूरतमंद बच्चों को रुपये दिये गये। कार्यक्रम के संयोजक कृष्णा कुमार लोहिया रहे। ट्रस्टी रामनाथ झुन्झुनवाला कार्यक्रम में उपस्थित रहे। विश्‍वंभर नेवर ने धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यक्रम का संचालन महावीर प्रसाद रावत ने किया।

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