इंजीनियर हत्या कांड : किराएदार ने की बदले की भावना से हत्या

संजय ने कबूला अपना जुर्म

कान के पीछे खरोंच को देखकर हुआ संदेह

कोलकाता, समाज्ञा

 साल्टलेक के बीटी ब्लॉक में सेवानिवृत्त इंजीनियर अभिजीत नाग चौधरी (57) की हत्या के मामले में उसे किराएदार संजय अग्रवाल को गिरफ्तार किया है। संजय ने ही अभिजीत की हत्या की है। हत्या की जांच कर रही विधाननगर आयुक्त पुलिस ने नौकरानी और किरायेदार संजय अग्रवाल से पूछताछ की। पूछताछ के बाद शुक्रवार को पुलिस ने संजय को गिरफ्तार कर लिया। उसका एक निजी फर्म है। पुलिस ने जांच में पाया कि संजय का संबंध अभिजीत के साथ काफी समय से अच्छा नहीं था। 2012 में अभिजीत की सास की हत्या उसके नौकर ने ही तकिए से दम घोट कर हत्या कर दी थी, उस समय भी संजय पर ही हत्या का आरोप लगाया गया था। हालांकि, इसे किसी अज्ञात कारण से उस समय छोड़ दिया गया था। इस संबंध में वित्तीय और राजनीतिक प्रभाव देने का भी उनके खिलाफ शिकायत थी। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कुछ दिन पहले संजय ने मृतक से 45 हजार रुपए लिए थे। पूछताछ में संजय ने कबूल किया कि उधार की राशि नहीं लौटाने पर अभिजीत द्वारा परिजनों के सामने अपमानित किए जाने से वह नाराज था। अपमान का बदला लेने के लिए ही उससे अभिजीत की हत्या कर दी। पुलिस संजय को शनिवार को विधाननगर अदालत में पेश करेगी। फिलहाल उससे पूछताछ कर हत्या में इस्तेमाल हथियारों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। विधाननगर कमिशनरेट के पुलिस उपायुक्त एस राजकुमार ने शुक्रवार को संवाददाता सम्मेलन कर बताया कि पूछताछ में संजय ने अपना अपराध कबूल कर लिया है। उसने बताया कि अभिजीत के मकान में कमरा किराए पर लेकर एफएनसी कंस्ट्रक्शन नाम की कंपनी चलाता है। उसने अभिजीत से 42,000 रुपये कर्ज लिए थे। पर व्यापार में मंदी के कारण वह पैसे नहीं लौटा पा रहा था। इस कारण अभिजीत ने उसकी पत्नी-परिवार के सदस्यों के सामने ही बुरी तरह जलील किया था। तभी से वह बदला लेने की योजना बनाने लगा। गत 13 दिसंबर की रात वह बीडी ब्लॉक स्थित 473 नंबर मकान में पहुंचा, जहां अभिजीत रहते हैं। संजय के पास अभिजीत के घर की नकली चाभी थी। उसकी मदद से वह भीरत तो घुस गया, लेकिन कमरे के बाहर लगा ग्रील बंद देख परेशान हो उठा। पर वहां से लौटने के बजाय सीढ़ी पर बैठ कर इंतजार करने लगा। कुछ देर बाद अभिजीत हाथ में शराब की बोतल लेकर घर से बाहर निकल छत पर जाने लगे, तभी संजय ने दबोच लिया और धारदार हथियार से ताबड़तोड़ कई बार हमला कर दिए। वह चीख न सके इस लिए गले की नस व नली काट दी। यही नहीं, पुलिस को बरगलाने के लिए गुप्तांग भी काट दिया। फिर वहां से अपने ऑफिस में पहुंचा। वहां अपने उपर लगे खून के दाग धोए और हथियारों को साफ किया। इसके बाद दरवाजा बंद कर वहां से चला गया। अगले दिन यानी 14 दिसंबर की सुबह दोबारा अभिजीत के घर पहुंचा और अनजान बनने की कोशिश करने लगा। पर जांच में उतरी पुलिस को संजय के कान के पीछे लगे खरोंच के निशान देख संदेह हुआ। जांच में मोबाइल का टावर लोकेशन भी वारदात के आस पास दिखा। इसके बाद पुलिस ने संजय को हिरासत में लेकर सख्ती से पूछताछ की, तो वह टूट गया और अपना अपराध कबूल कर लिया।

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