हरित ऊर्जा के लक्ष्य से पिछड़ रहा पश्चिम बंगाल – कोलकाता

कोलकाता, समाज्ञा रिपोर्टर

पश्चिम बंगाल सरकार 2022 तक राज्य में 175 गीगावाट हरित ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य पूरा करने के लिए जरूरी अपने नवीकरणीय खरीद दायित्व लक्ष्य (आरपीओ) को पूरा करने में पिछड़ रहा है। ऐसा मानना है ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का। जानकारी के अनुसार आरपीओ मुख्यत: बिजली उत्पादन कंपनियों के लिए निर्धारित नियम है जिसके अनुसार उन्हें अपनी जरूरत का कुछ हिस्सा नवीकरणीय ऊर्जा से पूरा करना होता है।

इस बारे में  कंसल्टिंग फार्म ब्रिज टू इंडिया ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि केंद्रीय नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने देश में 2022 तक ऊर्जा की कुल जरूरत का आठ फीसदी हिस्सा हरित ऊर्जा से पूरा करने के लिए अलग-अलग राज्यों के लिए आरपीओ का अलग-अलग लक्ष्य निर्धारित कर रखा है। ब्रिज टू इंडिया के प्रबंध निदेशक विनय रुस्तगी ने कहा, “बिजली एक समवर्ती विषय है, सौर अक्षय खरीद जिम्मेदारी लक्ष्य वास्तव में राज्य स्तर पर प्रशासित और विनियमित होते हैं। दुर्भाग्य से, डिस्मोप्स (पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों) की खराब वित्तीय कारणों से देश में इस नियम को नियमित रूप से लागू नहीं किया जा पा रहा है।  जानकारी के अनुसार 2022 के लक्ष्य में पवन ऊर्जा से 60  गीगावॉट, सौर ऊर्जा से 100 गीगावॉट, बायोमास बिजली से 10  गीगावॉट और छोटे जल विद्युत ऊर्जा से पांच गीगावॉट शामिल हैं।

लक्ष्य को पूरा करने के लिए भारत को पांच साल में एक साल में 18 गीगावॉट की दर से 90 गीगावॉट सौर स्थापित करना होगा।

इस बारे में रिसर्च फार्म मर्कम कैपिटल ग्रूप का कहना है कि आरपीओ नियमों को लागू करने में दायित्व की कमी व दंड की कमी के कारण कई राज्य अपने आरपीओ लक्ष्य पूर्ति का पालन नहीं कर पा रहे हैं। अगर सभी राज्यों ने विद्युत नियामक कमिशन द्वारा निर्धारित लक्ष्य के अनुसार आरपीओ पर काम किया होता तो 2016-17 तक 17.7 गीगावॉट ऊर्जा स्थापित किया गया होता। सामान्य तौर पर, गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश के साथ दक्षिणी राज्य अनुपालन में अग्रणी रहे हैं, जबकि महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश लक्ष्य के पीछे काफी पीछे हैं। सौर विशेषज्ञ एसपी गनचौधरी ने कहा कि पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा और बिहार अपने आरपीओ के लक्ष्य को पूरा करने में असफल रहे हैं। कोयला का भंडार रखने वाले पूर्वी भारत के राज्यों ने अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में निवेशकों को आकर्षित करने के लिए प्रयास नहीं किया है।

रुस्तगी ने कहा कि हर साल आरपीओ लक्ष्य बढ़ाए जा रहे हैं,  इसलिए अगर राज्यों को अक्षय ऊर्जा बढ़ती मात्रा में खरीदना पड़ता है, तो उनके प्रदर्शन में अगले 3-4 सालों में बदलाव की संभावना नहीं है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *