महज 36 साल की उम्र में ही सिविल सेवा परीक्षा क्रैक नव युवाओं के लिए मिसाल बनें अज़र ज़िया  

                                                                                                                                                   By Annu Rai

कोलकाता : साल 2010 में हेरिटेज इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी कोलकाता से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में बी.टेक की डिग्री प्राप्त करने वाले अज़र ज़िया ने महज 36 साल की उम्र में ही सिविल सेवा परीक्षा क्रैक कर 97वां रैंक हासिल किया, जो कि बंगाल में सबसे अधिक है

और आजादी के बाद वे तीसरे मुस्लिम उम्मीदवार व पहले व्यक्ति हैं, जो महज 36 साल की उम्र में आईएएस ऑफिसर बने हैं। हालांकि ज़िंदगी से ज़्यादा की चाह में उन्होंने एक अच्छे तनख्वाह वाले कॉरपोरेट जॉब की भी फिक्र नहीं की और अपने सपने को साकार करने में जुट गए। सेंट जेम्स स्कूल से स्कूली शिक्षा प्राप्त करने के बाद ज़िया ने कोलकाता इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी कोलकाता से स्नातक की उपाधि ली और फिर एमबीए के लिए दिल्ली के फैकल्टी ऑफ़ मैनेजमेंट स्टडीज़ चले गए। वहीं आज़र ज़िया बताते हैं कि शुरुआत में वे अपने लिए एक कॉर्पोरेट जॉब चाहते थे और इसलिए उन्होंने इंजीनियरिंग किया। लेकिन कुछ सालों बाद उन्हें अहसास हुआ कि वे बिजनेस मैनेजमेंट डिग्री के साथ काफी बेहतर कर सकते हैं। इसलिए उन्होंने कैट परीक्षा दी और फिर एफएमएस दिल्ली से एमबीए की डिग्री ली और तुरंत बाद उन्हें ब्रांड मैनेजर के तौर पर एशियन पेंट्स में नौकरी मिल गयी। कुछ समय काम करने के उपरांत वहां भी उनका जी नहीं लगा और अच्छे वेतन की बिना फिक्र किए उन्होंने साल 2015 में जॉब से इस्तीफा देने का फैसला कर लिया। इसके बाद यूपीएससी परीक्षा की तैयार के लिए ज़िया ने दिल्ली स्थित हमदर्द स्टडी सर्किल ज्वाइंन कर ली। हालांकि उनके इस फैसले से उनका परिवार शुरू में नाखुश था लेकिन बाद में सभी ने उनका सपोर्ट किया। चूंकि उनके पिता और चाचा दोनों सिविल सेवा थे, इसलिए उन्हें एक बेहतर माहौल मिला और तीसरे प्रयास में ही वे सफल हो गए। साल 2016 में उन्होंने प्रेलिम्स में उत्तीर्ण किया, लेकिन चिकनगुनिया होने की वजह से वे काफी बीमार हो गए थे। इसलिए फिर से साल 2017 में वे परीक्षा में बैठे और उन्हें इस बात पर भरोसा ही नहीं हुआ कि वे टॉप 100 में शामिल होंगे। महानगर के बेनियापुकुर स्थित तातिबागान के रहवासी अज़र की मेहनत और लगन ने उन्हें वो मुकाम दिलाया, जिसकी चाह में वे लागातार जुटे रहें। उनकी इस कामयाबी पर हेरिटेज ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस कोलकाता के सीईओ प्रदीप अग्रवाल ने कहा कि हमें गर्व है कि अज़र ज़िया ने राष्ट्र में अपने राज्य का गौरव बढ़ाया है और वे हमारे सामने एक बेमिसाल नजीर के तौर पर हैं। साथ ही संभावित इंजीनियरों के लिए एक प्रेरणा भी हैं। इतना ही नहीं आलिया विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित एक विशेष कार्यक्रम रहनुमा-ए-निशान में उन्हें सम्मानित भी किया गया था। 

 

6 Comments on “महज 36 साल की उम्र में ही सिविल सेवा परीक्षा क्रैक नव युवाओं के लिए मिसाल बनें अज़र ज़िया  ”

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