अवैध कार्यों में लिप्त आप, विश्‍वास खोया : शुभ्रांशु

-तृणमूल विधायक ने अभिषेक को चिठ्ठी लिख पूछा
-अमित शाह के आरोप पर सांसद से मांगा स्पष्टीकरण

कोलकाता : भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने अगस्त में युवा तृणमूल अध्यक्ष व सांसद अभिषेक बनर्जी पर राज्य में सिंडिकेट के धंधे में लिप्त होने का गंभीर आरोप लगाया था। जवाब में अभिषेक ने अमित शाह को माफी नहीं मांगने पर अदालत में घसीटने की धमकी दी थी। क्या आरोप सही है? अब यह सवाल उन्हीं की पार्टी के विधायक व मुकुल रायके बेटे शुभ्रांशु राय ने चिठ्ठी लिखकर अभिषेक बनर्जी से पूछा है। उन्होंने पूछा है कि क्या आप अवैध कार्यों में लिप्त हैं, हमने आपसे विश्‍वास खोया! इस चिठ्ठी के वायरल होने के बाद तृणमूल के अंदर चर्चाओं का बाजार गर्म है कि क्या अब शुभ्रांशु भी पिता की रात पर चलने के लिए तैयार हैं?

मालूम हो कि 11 अगस्त को कोलकाता में एक रैली को संबोधित करते हुए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने अभिषेक बनर्जी पर सिंडिकेट चलाने का गंभीर आरोप लगाया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि राज्य में चल रहे सिंडिकेट में अभिषेक लिप्त हैं। साथ ही भाजपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया था कि केंद्र ने राज्य सरकार को अब तक 3.59 लाख?करोड़ रुपए दिए हैं, लेकिन इस फंड का क्या हुआ, इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। राज्य सरकार ने फंड का दुरुपयोग किया जिसमें अभिषेक बनर्जी स्वंय लिप्त हैं। इसके बाद ही अभिषेक ने अमित शाह के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उन्हें चिठ्ठी लिख कर सार्वजनिक तौर पर माफी मांगने के लिए कहा था। और ऐसा नहीं करने पर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की धमकी भी दी थी। लेकिन अब बीजपुर के तृणमूल विधायक शुभ्रांशु राय की एक चिठ्ठी सामने आई है जिसमें उन्होंने आरोप की सत्यता के बारे में जानकारी मांगी है। उन्होंने चिठ्ठी में अमित शाह द्वारा लगाए गए 3.59 लाख करोड़ रुपए के गलत इस्तेमाल पर भी स्पष्टीकरण मांगी है तथा कहा है कि आरोप अखबारों में छपे तथा चैनलों में दिखाए गए थे। सब कुछ देखकर लगता है कि आप भी इसमें लिप्त हैं। आप बताएं कि अमित शाह के लगाए आरोप सही हैं या नहीं? मैंने आपके प्रति विश्‍वास खोया है। पता चला है कि शुभ्रांशु ने चिठ्ठी 14 अगस्त को अभिषेक को लिखी थी, लेकिन यह अब सामने आई है जो बिना लेटर पैड पर लिखी है। इस बारे में पूछने पर शुभ्रांशु ने चिठ्ठी की सत्यता स्वीकार की। हालांकि, उन्होंने उसकी विषयवस्तु याद होने से इनकार किया और कहा कि जवाब मिला है, लेकिन यह बिल्कुल ही निजी है। इसकी जानकारी नहीं देंगे। वहीं, अभिषेक के कार्यालय से इस बारे में कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। वैसे, कुछ राजनीतिक जानकार चिठ्ठी की सत्यता पर भी सवाल उठा रहे हैं।

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