किडनी रैकेट का भंडाफोड़,कोलकाता में प्राइवेट अस्पताल को थी किडनी बेचने की तैयारी

किंगपिंग अश्फाक अहमद सहित चार गिरफ्तार

बाईपास में जा रही बस से हुई गिरफ्तारी

कोलकाता, समाज्ञा

कोलकाता के आनंदपुर में स्थित एक गैर सरकारी अस्पताल की मदद से महानगर में धड़ल्ले से चलाये जा रहे किडनी रैकेट गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए कोलकाता पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार किया है। इसमे एक महिला भी शामिल है। गिरफ्तार आरोपियों के नाम बैद्यनाथ बर्मन, तेहारुल ईस्लाम, अश्फाक अहमद और ज्योत्सना बर्मन है। इसमें अश्फाक किडनी रैकेट गिरोह का प्रमुख संचालक है। वह महानगर के पोर्ट इलाके के खिदिरपुर का रहनेवाला है, जबकि अन्य गिरफ्तार तीन लोग किडनी डोनर हैं और उत्तर दिनाजपुर के विभिन्न इलाकों के निवासी हैं।  सभी को अदालत में पेश करने पर उन्हें छह दिसंबर तक पुलिस हिरासत में भेजा गया है। कोलकाता में नाम बदलकर ये लोग किडनी डोनेट करने आये थे। इनके पास से बदले हुए नाम का नकली वोटर कार्ड, आधार कार्ड व कुछ मेडिकल कागजात जब्त किया गया है. कोलकाता पुलिस के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (5) सह संयुक्त आयुक्त (अपराध) विशाल गर्ग ने बताया कि गुप्त सूचना के आधार पर चारों को 360 ग्राम ब्राउन सुगर के साथ गिरफ्तार किया गया था। उस समय इनके पास मौजूद सामान की जांच की गयी तो उसमें कुछ मेडिकल के कागजात मिले। उन कागजातों की जांच करने पर किडनी रैकेट चलाये जाने का खुलासा हुआ। गिरफ्तार गिरोह के लीडर अशफाक ने प्राथमिक पूछताछ में खुलासा किया है कि ड्रग्स का धंधा करने के अलावा वह चार से पांच लाख रुपये मिलने का लालच देकर किडनी डोनर से संपर्क करता था। इसके बाद आनंदपुर इलाके में उस अस्पताल में ले जाकर किडनी डोनेट कर प्रत्येक किडनी के बदले सात से आठ लाख रुपये ऐंठता था। गिरफ्तार आरोपियो से पूछताछ कर इस गिरोह के साथ जुड़े अस्पताल के चिकित्सकों के नाम का पता लगाने की कोशिश हो रही है। वहीं मामले को तूल पकड़ता देख आरटीआईआईसीएस के प्रवक्ता ने कहा कि बिना किसी औपचारिक जांच के देश में किडनी प्रत्यारोपण करना संभव नहीं। संस्था का प्रयास रहता है कि कानूनी प्रक्रिया को पूरा कर के ही किडनी प्रत्यारोपण कराया जाये। 

 

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