पूजा कमेटियों को अनुदान रोकने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

-ममता सरकार की शीर्ष न्यायालय में बड़ी राहत
-सरकार से 6 हफ्ते में मांगा हलफनामा

कोलकाता/दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने पश्‍चिम बंगाल में 28,000 दुर्गा पूजा समितिरों को 28 करोड़ रुपए देने के राज्र सरकार केे निर्णर पर रोक लगाने से शुक्रवार को इनकार कर दिरा। वैसे, न्रारमूर्ति मदन बी लोकूर और न्रारमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ इस सवाल पर विचार के लिरे तैरार हो गरी कि क्रा राज्र अपने विवेकाधिकार का इस्तेमाल करके धार्मिक गतिविधिरों के लिए पूजा समितिरों रा क्लब को धन दे सकती है? हालांकि, खंडपीठ ने इस संबंध में ममता बनर्जी सरकार को नोटिस जारी कर उससे छह सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। इस बीच सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला पूजा के पहले राज्य सरकार के लिए बड़ी राहत वाली है तथा विपक्षी दलों विशेष कर भाजपा के लिए झटका है क्योंकि भाजपा व वाम दल सरकार के इस फैसले का विरोध कर रहे हैं।
खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि नोटिस जारी किरा जाए। राज्र सरकार के वकील ने न्रारालर में ही नोटिस स्वीकार किरा। नोटिस का जवाब छह सप्ताह में देना है और इस बीच कोई रोक नहीं होगी। पीठ ने कहा कि इस धन का वितरण राज्र पुलिस के माध्रम से पूजा समितिरों में किरा जारेगा। राचिकाकर्ता सौरव दत्त के वकील ने राज्र सरकार के फैसले पर रोक लगाने का अनुरोध करते हुरे कहा था कि रह संविधान के बुनिरादी ढांचे और पंथनिरपेक्षता के सिद्धांत के विरूद्ध है और सरकार की रह कार्रवाई चौंकाने वाली है। साथ ही रह सांप्रदारिक भावनाओं को बढ़ावा दे सकती है। इससे पहले सुनवाई शुरू होते ही पीठ ने राज्र सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल से जानना चाहा कि सरकार इस तरह का उपहार कैसे दे सकती है? जवाब में सिब्बल ने कहा कि राज्र सरकार ने पूजा समितिरों को सीधे कोई धन नहीं दिरा है और रह राशि पुलिस के माध्रम से पूजा आरोजकों को सामुदारिक व्रवस्था के लिए वितरित की गरी है। राचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि राज्र सरकार बगैर किसी दिशानिर्देश के कैसे इतना धन दे सकती है? मालूम हो कि इससे पहले कलकत्ता हाईकोर्ट ने 10 अक्टूबर को 28,000 पूजा समितिरों को दस दस हजार रुपए देने के सरकार के फैसले में हस्तक्षेप करने से यह कहते हुए इनकार कर दिरा था कि न्यायपालिका, विधायिका के फैसलों में हस्तक्षेप नहीं करेगी।

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